कटघोरा/छुरीकला। शासन की मंशा है कि विकास कार्य समय पर हों और भुगतान में पारदर्शिता बनी रहे, लेकिन नगर पंचायत छुरीकला में व्यवस्था इसके उलट नजर आ रही है। अटल परिसर निर्माण और मूर्ति स्थापना जैसे महत्वपूर्ण कार्य को समय पर पूर्ण करने के बाद भी एक ठेकेदार को अपने ही हक के पैसे के लिए ‘आमरण अनशन’ का रास्ता चुनना पड़ा है।
क्या है पूरा मामला?
वर्ष 2024 में अग्रवाल एजेंसी कटघोरा को नगर पंचायत छुरीकला के अंतर्गत ‘अटल परिसर निर्माण एवं मूर्ति स्थापना’ का कार्य सौंपा गया था। 20 लाख रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को ठेकेदार अनिल अग्रवाल ने अनुबंध की शर्तों के अनुसार समय पर पूरा कर दिया। परिसर का लोकार्पण और हैंडओवर हुए भी 6 माह बीत चुके हैं, लेकिन विडंबना देखिए कि अब तक केवल 40 प्रतिशत राशि का ही भुगतान किया गया है। शेष 12 लाख रुपये के लिए ठेकेदार पिछले आधे साल से दफ्तरों के चक्कर काट रहा है।
प्रतिमा के सामने अनशन पर बैठे ठेकेदार
बार-बार की गुहार अनसुनी होने के बाद अनिल अग्रवाल ने प्रशासन को चेतावनी दी थी कि यदि 9 फरवरी 2026 तक भुगतान नहीं हुआ, तो वे अनशन करेंगे। वादे के मुताबिक, आज 10 फरवरी से वे श्रद्धेय अटल जी की प्रतिमा के सामने आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। इधर, उनके बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर परिजन बेहद चिंतित हैं।
जिम्मेदारी का ‘फुटबॉल’ और सिस्टम की कछुआ चाल
इस पूरे प्रकरण में अधिकारियों के बीच तालमेल की भारी कमी उजागर हुई है:
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सीएमओ का पक्ष: मुख्य नगरपालिका अधिकारी का कहना है कि फाइल उन तक पहुंची ही नहीं। उन्होंने देरी का ठीकरा इंजीनियर पर फोड़ते हुए कहा कि इंजीनियर के पास कटघोरा का अतिरिक्त प्रभार है, जिससे यहां का काम प्रभावित हो रहा है। इसके लिए उन्हें नोटिस भी दिया गया है।
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इंजीनियर का दावा: दूसरी ओर, इंजीनियर चंद्रप्रकाश जायसवाल का कहना है कि उन्होंने फाइल क्लियर कर दी है और आज चेक कट जाएगा।
बड़ा सवाल: जब कार्य 6 महीने पहले पूरा हो गया था, तो फाइल को सीएमओ तक पहुंचने में इतना वक्त क्यों लगा? क्या अनुबंध पर हस्ताक्षर करने वाले जिम्मेदार अधिकारी अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ सकते हैं?
प्रशासनिक साख पर सवाल
ठेकेदार का अनशन पर बैठना नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या किसी भी भुगतान के लिए ठेकेदार को अपनी जान दांव पर लगानी पड़ेगी? फिलहाल सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आज सच में चेक जारी होगा या यह महज एक और आश्वासन बनकर रह जाएगा।








