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मेहनती छात्रों के भविष्य से खिलवाड़: 16 साल बाद ‘पोरा बाई कांड’ में बड़ा फैसला, छात्रा और प्राचार्य समेत 4 को 5-5 साल की जेल

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जांजगीर-चांपा: छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित शिक्षा घोटालों में से एक ‘पोरा बाई नकल प्रकरण’ में 16 साल बाद न्याय की जीत हुई है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश जी.आर. पटेल की अदालत ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए मुख्य आरोपी छात्रा पोरा बाई, प्राचार्य और केंद्राध्यक्ष सहित चार लोगों को कड़ी सजा सुनाई है।

सजा का विवरण: जेल और भारी जुर्माना

अदालत ने धोखाधड़ी और दस्तावेजों में हेराफेरी का दोषी पाते हुए निम्नलिखित सजा सुनाई:

दोषी: पोरा बाई (छात्रा), फूलसाय नृसिंह (केंद्राध्यक्ष), एस.एल. जाटव (प्राचार्य) और दीपक जाटव।सजा: प्रत्येक को 5-5 वर्ष का कठोर कारावासअर्थदंड: सभी पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना।अन्य: मामले के 5 अन्य आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया है।

प्रदेश टॉप करने पर खुला था राज

यह मामला साल 2008 का है। बिर्रा (चांपा) की छात्रा पोरा बाई ने 12वीं बोर्ड की मेरिट लिस्ट में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। लेकिन यह सफलता विवादों के घेरे में आ गई जब:

लिखावट का अंतर: माध्यमिक शिक्षा मंडल की जांच में पता चला कि उत्तरपुस्तिका की राइटिंग पोरा बाई की वास्तविक लिखावट से मेल नहीं खाती।

दस्तावेजों में हेरफेर: जांच में खुलासा हुआ कि परीक्षा में बैठने के लिए फर्जी तरीके से दस्तावेज तैयार किए गए थे।

साजिश: तत्कालीन सचिव के निर्देश पर हुई जांच में नौ लोगों के खिलाफ जालसाजी (धारा 420, 467, 468, 120-बी) का मामला दर्ज हुआ था।

निचली अदालत ने किया था बरी, सत्र न्यायालय ने पलटा फैसला

दिलचस्प बात यह है कि साल 2021 में निचली अदालत (न्यायिक मजिस्ट्रेट चांपा) ने सबूतों की कमी बताते हुए सभी 9 आरोपियों को बरी कर दिया था। लेकिन शासन की अपील पर सुनवाई करते हुए द्वितीय अपर सत्र न्यायालय ने इस फैसले को पलट दिया।

कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: > “आरोपियों ने केवल शिक्षा मंडल को धोखा नहीं दिया, बल्कि उन हजारों मेहनती छात्रों के सपनों और भविष्य पर प्रहार किया है जो दिन-रात कड़ी मेहनत करते हैं।”

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