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बेमेतरा में ‘देव पक्षी’ का आगमन! सफेद गरुड़ मानकर उमड़ी श्रद्धा, फार्म हाउस बना शक्तिपीठ

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छत्तीसगढ़: बेमेतरा जिले के बेरला विकासखंड स्थित ग्राम सलधा खम्हरिया इन दिनों एक रहस्यमयी और दिव्य घटना का केंद्र बना हुआ है। यहाँ एक फार्म हाउस में दिखे विशालकाय सफेद पक्षी ने न केवल ग्रामीणों की जिज्ञासा बढ़ा दी है, बल्कि इसे पौराणिक ‘गरुड़’ मानकर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है।

आस्था और रहस्य का संगम

जैसे ही इस दुर्लभ पक्षी की खबर फैली, फार्म हाउस का नजारा किसी तीर्थ स्थल जैसा हो गया। स्थानीय ग्रामीण इसे भगवान विष्णु का वाहन ‘गरुड़’ मानकर इसकी पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

  • भक्तिमय माहौल: लोग फल, फूल, नारियल और अगरबत्ती लेकर पहुँच रहे हैं।

  • भजन-कीर्तन: पक्षी की उपस्थिति में ग्रामीणों ने भजन और कीर्तन शुरू कर दिए हैं, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक हो गया है।

  • शुभ संकेत: क्षेत्र के बुजुर्गों और ग्रामीणों का मानना है कि इस दिव्य पक्षी का आगमन गांव के लिए सुख-समृद्धि का प्रतीक है।

आखिर क्या है इसकी विशेषता?

यह पक्षी सामान्य पक्षियों से काफी अलग और आकर्षक है, जिसने विशेषज्ञों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है:

  1. विशाल कद-काठी: इसका आकार सामान्य चील या बाज से कहीं बड़ा है।

  2. दूध जैसा सफेद रंग: इसकी पूरी देह सफेद है, जिसे पवित्रता से जोड़कर देखा जा रहा है।

  3. शांत और गंभीर व्यवहार: शोर-शराबे और भीड़ के बावजूद पक्षी का व्यवहार बेहद शांत है, जो लोगों को और अधिक प्रभावित कर रहा है।

प्रशासन और वन विभाग की चुनौती

जहाँ एक ओर ग्रामीणों की आस्था चरम पर है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन के सामने इसकी सुरक्षा और पहचान की चुनौती है।

  • पहचान का संकट: अब तक आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह पक्षी किस प्रजाति का है। कुछ विशेषज्ञ इसे हिमालयी गिद्ध (Himalayan Griffon) का दुर्लभ ‘एल्बिनो’ (सफेद) रूप या कोई प्रवासी पक्षी मान रहे हैं।

  • सुरक्षा के घेरे में: स्थानीय निवासी लीलाराम साहू के अनुसार, दूर-दराज के इलाकों से लोग पहुंच रहे हैं। वन विभाग की टीम मौके पर तैनात है ताकि भीड़ के कारण पक्षी को कोई नुकसान न पहुंचे।

“मैंने अपने जीवन में ऐसा पक्षी पहले कभी नहीं देखा। यह हमारे लिए साक्षात देव दर्शन जैसा है।” > — लीलाराम साहू, स्थानीय निवासी

यह घटना विज्ञान और विश्वास के बीच की एक दिलचस्प कड़ी बन गई है। जब तक पक्षी विशेषज्ञ इसकी प्रजाति की पुष्टि नहीं करते, तब तक बेमेतरा के इस गांव के लिए यह ‘गरुड़’ का ही अवतार बना रहेगा।

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