SC Slams Railway’s ‘Double Standard’: Why Insurance Only for Online Tickets, Not Counter Bookings?
The Supreme Court has questioned Indian Railways: भारतीय रेलवे में सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के हक में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा और चुभता हुआ सवाल उठाया है। कोर्ट ने रेलवे की उस नीति को आड़े हाथों लिया है जिसमें दुर्घटना बीमा (Accident Insurance) का लाभ केवल उन यात्रियों को मिलता है जो ऑनलाइन टिकट बुक करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की दो टूक: ‘जोखिम सबका बराबर, तो सुरक्षा अलग क्यों?’
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने सुनवाई के दौरान इस विसंगति पर हैरानी जताई। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में पूछा कि जब एक ही ट्रेन में सफर करने वाले सभी यात्रियों के लिए दुर्घटना का खतरा एक समान है, तो रेलवे टिकट खरीदने के तरीके (ऑनलाइन बनाम काउंटर) के आधार पर बीमा सुविधा में भेदभाव कैसे कर सकता है?
सुरक्षा पर रेलवे की घेराबंदी
मामले की गहराई में जाते हुए कोर्ट ने कुछ कड़े निर्देश और टिप्पणियां की हैं:
टिकट का तरीका सुरक्षा का पैमाना नहीं: बेंच ने साफ किया कि यात्री की सुरक्षा रेलवे की प्रणालीगत जिम्मेदारी है। सुरक्षा इस बात पर निर्भर नहीं होनी चाहिए कि यात्री ने ऐप से टिकट लिया है या स्टेशन की खिड़की से।
पुरानी रिपोर्ट्स का ‘कड़वा सच’: सीनियर एडवोकेट शिखिल सूरी ने काकोडकर कमेटी (2012) से लेकर CAG (2016) तक की रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए बताया कि रेलवे सुरक्षा की बड़ी खामियों को सालों से नजरअंदाज किया जा रहा है।
सिस्टम में सुधार की जरूरत: रेलवे की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने स्वीकार किया कि फिलहाल यही व्यवस्था लागू है, जिस पर कोर्ट ने असंतोष जताया।
इन दो मोर्चों पर काम करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे को अपनी सुरक्षा नीति में सुधार के लिए दो मुख्य बिंदुओं पर तुरंत ध्यान केंद्रित करने को कहा है:
रेलवे ट्रैक्स की मरम्मत: खराब ट्रैक और मेंटेनेंस की कमी हादसों की सबसे बड़ी वजह है, जिसे दुरुस्त करना अनिवार्य है।
रेलवे क्रॉसिंग्स की सुरक्षा: देशभर में रेलवे क्रॉसिंग्स पर होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं।








