कोरबा, छत्तीसगढ़ 13 दिसंबर: मूलनिवासी संघ की कोरबा इकाई ने 13 दिसंबर 2025 को ग्राम झाबर में SECL (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) द्वारा प्रभावित भू-विस्थापितों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की।

मुख्य मुद्दे और संघ का संकल्प
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पीड़ा और वंचना: बैठक में मुख्य रूप से कोयलांचल क्षेत्र के मूलनिवासी भू-विस्थापितों की समस्याओं पर चर्चा की गई। लंबे समय से SECL द्वारा खदान विस्तार हेतु जमीन अर्जन के बावजूद, मूलनिवासी रोजगार, उचित मुआवजा, और बसाहट के लिए ठोकरें खा रहे हैं।
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राजनीतिक छल: संघ ने आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रतिनिधि जमीन अर्जन से पहले झूठे वादे करके मूलनिवासियों को छला जाता है और बाद में SECL के पक्ष में खड़े हो जाते हैं, जिससे भू-विस्थापित अपने हक-अधिकार से वंचित रह जाते हैं।
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संघ की पहल: वर्षों पुरानी समस्याओं के निराकरण के लिए मूलनिवासी संघ (एक गैर-राजनीतिक, पंजीकृत सामाजिक संगठन) ने विशेष पहल की है। संघ भू-विस्थापितों को संगठित कर संवैधानिक तरीके से उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने हेतु जागरूक कर रहा है।
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संवैधानिक संघर्ष पर जोर: संघ का मानना है कि वर्तमान में हक अधिकार पाने के लिए भारतीय संविधान के निर्धारित मार्गों पर चलना ही एकमात्र सही तरीका है।
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संघर्ष तेज करने का आश्वासन: प्रदेश अध्यक्ष अमरजीत पटेल ने कहा कि हक की लड़ाई और तेज की जाएगी। जरूरत पड़ने पर मामलों को सिविल कोर्ट, हाई कोर्ट, और सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया जाएगा। उन्होंने मलगांव घोटाले का भी जिक्र किया, जिसने प्रदेश मीडिया में सुर्खियां बटोरी थीं।
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क्षेत्रीय विस्तार: संगठन का विस्तार तेजी से हो रहा है, खासकर कटघोरा ब्लॉक में। संघ का कार्यालय फिलहाल पाली रोड, दीपका में संचालित है।
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मलगांव के विशिष्ट मामले: जिला अध्यक्ष उदय चौधरी, कटघोरा ब्लॉक अध्यक्ष राजेश जायसवाल और हरदी बाजार ब्लॉक अध्यक्ष रन सिंह चौहान ने मलगांव के मामलों को उजागर किया, जहाँ SECL द्वारा बेटियों को बसाहट हेतु भूमि आवंटन और भू-विस्थापितों को ₹15-15 लाख रुपये देने के वादे किए गए थे, लेकिन बाद में R&R पॉलिसी का हवाला देकर हक से वंचित किया जा रहा है।
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जागरूकता अभियान: संघ न केवल वर्तमान भू-विस्थापितों को एक मंच पर ला रहा है, बल्कि भविष्य में SECL में समाहित होने वाले अन्य गांवों के लोगों को भी संगठन से जोड़कर जागरूक कर रहा है।
बैठक में सरगुजा जोन प्रभारी लालकेश्वर दास ने भी शिरकत की और देशभर में मूलनिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन के प्रयासों पर प्रकाश डाला।








