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शिक्षा के मंदिर में ‘खूनी’ तांडव: रसोइए के नशे और लापरवाही ने मासूम को पहुँचाया अस्पताल

कोरबा (कटघोरा):  कोरबा जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार कटघोरा क्षेत्र के छुरी स्थित प्री-मैट्रिक आदिवासी छात्रावास में एक रसोइए ने नशे की हालत में छठी कक्षा के छात्र पर टंगिया (कुल्हाड़ी) से हमला कर दिया। इस घटना ने न केवल छात्रावासों में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं, बल्कि प्रशासनिक निगरानी की पोल भी खोल दी है।

घटना का विवरण: जब रक्षक ही बना भक्षक

घटना के वक्त छात्रावास अधीक्षक अपनी ड्यूटी से नदारद थे, जिसका फायदा उठाते हुए आरोपी केसर दुबे (जो रसोइया और चपरासी दोनों का काम संभालता है) ने शराब के नशे में मासूम पुष्पेंद्र कंवर पर हमला कर दिया। कुल्हाड़ी का वार छात्र की आंख के ठीक ऊपर लगा। गनीमत रही कि समय रहते छात्र को अस्पताल पहुंचाया गया, जहाँ उसकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है।

व्यवस्था की खामियाँ और संगीन आरोप

यह कोई इकलौती घटना नहीं है। स्थानीय सूत्रों और छात्रावास के बच्चों से मिल रही जानकारी के अनुसार, आरोपी केसर दुबे अक्सर बच्चों के साथ दुर्व्यवहार करता था। उस पर निम्नलिखित गंभीर आरोप लगे हैं:

  • अवैध वसूली: बच्चों से डरा-धमकाकर पैसे वसूलना।

  • नियमित मारपीट: छोटी-छोटी बातों पर मासूमों को प्रताड़ित करना।

  • अधीक्षक की लापरवाही: अधीक्षक की अनुपस्थिति ने आरोपी के हौसले बुलंद कर दिए थे।

“छात्रावास जैसे सुरक्षित स्थानों पर धारदार हथियार का सुलभ होना और एक कर्मचारी का नशे में धुत रहना, प्रबंधन की घोर लापरवाही को दर्शाता है।”

प्रशासनिक कार्रवाई और आक्रोश

घटना के बाद कटघोरा पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया है। हालांकि, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों में भारी रोष है। उनकी मांग है कि केवल प्रतिबंधात्मक धाराओं में खानापूर्ति न की जाए, बल्कि आरोपी पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो और उसे तत्काल सेवा से बर्खास्त किया जाए।

साथ ही, ट्राइबल विभाग (आदिम जाति कल्याण विभाग) से मांग की गई है कि जिले के सभी छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था का ऑडिट किया जाए ताकि भविष्य में किसी और ‘पुष्पेंद्र’ को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

यह घटना हमें याद दिलाती है कि नियम और निर्देश कागजों तक ही सीमित हैं। जब तक जमीनी स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रावासों में मासूम बच्चे इसी तरह असुरक्षित रहेंगे।

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