मोहन भागवत ने कभी संस्कृत का एक श्लोक नहीं पढ़ा”: छत्तीसगढ़ में पूर्व CM बघेल के बयान से मचा सियासी बवाल
बिलासपुर 27 मई । छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बुधवार को बिलासपुर दौरे के दौरान भाजपा, आरएसएस और प्रमुख कथावाचकों पर चौतरफा तीखा हमला बोला। विश्रामपुर में एक धरना-प्रदर्शन में शामिल होने के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए बघेल ने केंद्र सरकार की नीतियों, धार्मिक मंचों के राजनीतिक इस्तेमाल और भाजपा नेताओं के आचरण पर गंभीर सवाल खड़े किए।
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धर्म के नाम पर राजनीति और भाजपा पर वार
भूपेश बघेल ने भाजपा के हिंदुत्व के दावों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि खुद को धर्म और संस्कृति का संरक्षक बताने वाली भाजपा के मंत्रियों पर ही गंभीर आरोप हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का नाम लेते हुए सीधे सवाल दागा, “जिन लोगों पर गौमांस खाने जैसे आरोप लगे हों, क्या धर्मगुरु उन्हें भी उचित मानते हैं? आखिर धार्मिक मंचों से केवल विपक्ष को ही निशाना क्यों बनाया जाता है?”
मोहन भागवत और कथावाचकों पर तंज
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर कटाक्ष करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने आज तक किसी सार्वजनिक मंच से संस्कृत का एक भी श्लोक नहीं बोला, फिर भी उन्हें धर्म और संस्कृति का सबसे बड़ा प्रतिनिधि बना दिया गया है।
बघेल ने देश के चर्चित कथावाचकों को भी नहीं बख्शा। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अगर वे पर्ची देखकर लोगों की परेशानियां दूर कर सकते हैं, तो उन्हें अपने गुरु के निर्देश पर देश में पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम भी कम करवाकर दिखाने चाहिए। वहीं, जगद्गुरु रामभद्राचार्य पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि वे अपनी ‘दिव्य दृष्टि’ से यह भी बताएं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने समझौते कर झुक क्यों जाते हैं।
‘मेलोडी’ पर कसा अनोखा व्यंग्य
सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर ट्रेंड होने वाले ‘मेलोडी’ शब्द पर बघेल ने चुटकी लेते हुए कहा, “मेलोनी का ‘मेलो’ और मोदी का ‘डी’ मिलकर मेलोडी बन गया है, मेलोडी खाओ और खुद जान जाओ।”
भूपेश बघेल के इन ताबड़तोड़ बयानों के बाद छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारों में भूचाल आ गया है और भाजपा की ओर से भी इस पर तीखे पलटवार के संकेत मिल रहे हैं।







