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गुटबाजी या चुनावी बिसात? कोरबा में तीन दिन के भीतर सिंहदेव और बघेल के अलग-अलग दौरे, सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज

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कोरबा/पाली-तानाखार 27 मई । छत्तीसगढ़ कांग्रेस में क्या वाकई सबकुछ ठीक चल रहा है? यह सवाल इस समय प्रदेश की सियासत और खासकर कोरबा जिले के राजनीतिक गलियारों में तेजी से तैर रहा है। वजह है—महज तीन दिनों के भीतर कांग्रेस के दो धुरंधरों का अलग-अलग समय पर कोरबा जिले के प्रवास पर पहुंचना। जहां एक ओर पूर्व डिप्टी सीएम टी. एस. सिंहदेव ने हसदेव के बहाने आदिवासी कार्ड खेला, वहीं ठीक दो दिन बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पाली-तानाखार ब्लॉक में अपनी मौजूदगी दर्ज कराकर जमीनी कार्यकर्ताओं को साधा। दिग्गज नेताओं के इन अलग-अलग दौरों को लेकर अब राजनीतिक पंडित कई तरह के सियासी मायने निकाल रहे हैं।

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24 मई: बुका में सिंहदेव संग जुटे दिग्गज, मंच पर दिखी एकजुटता

सियासी हलचल की शुरुआत 24 मई को हुई, जब पूर्व उप मुख्यमंत्री टी. एस. सिंहदेव कटघोरा क्षेत्र के ग्राम बुका (ग्राम पंचायत मड़ई) पहुंचे। यहां विस्थापित आदिवासी हसदेव जलाशय संघर्ष समिति द्वारा आयोजित “जल-जंगल-जमीन पर आदिवासी अधिकारों की रक्षा हेतु राज्य स्तरीय महासम्मेलन” में वे शामिल हुए।

इस मंच पर सिंहदेव के साथ:

📍डॉ. चरणदास महंत (नेता प्रतिपक्ष)📍दीपक बैज (प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष)📍जयसिंह अग्रवाल (पूर्व कैबिनेट मंत्री)

जैसे शीर्ष नेता एक साथ नजर आए। इसे कांग्रेस का हसदेव के मुद्दे पर बड़ा शक्ति प्रदर्शन और आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन की लड़ाई को धार देकर जनआंदोलन खड़ा करने की रणनीति के रूप में देखा गया।

26 मई: गुरसिया में ‘कका’ का एक्शन, बूथ स्तर पर संगठन कसने का मंत्र

इस महासम्मेलन के ठीक दो दिन बाद यानी मंगलवार (26 मई) को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अचानक कोरबा जिले के पाली-तानाखार विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत गुरसिया पहुंचे। दिलचस्प बात यह रही कि भूपेश बघेल के इस कार्यक्रम में 24 मई वाले मंच के बड़े चेहरे नदारद दिखे।

गुरसिया में आयोजित कांग्रेस कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण बैठक में भूपेश बघेल ने सीधे जमीनी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से संवाद किया। बैठक में संगठन की मजबूती, ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंपर्क बढ़ाने और आगामी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

  • कार्यकर्ताओं को नसीहत: बघेल ने कार्यकर्ताओं को रिचार्ज करते हुए कहा कि पार्टी को बूथ स्तर तक मजबूत बनाने के लिए सभी को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने आम जनता से जुड़े मुद्दों को आक्रामकता से उठाने पर जोर दिया।

  • भोला गोस्वामी के घर पहुंचे बघेल: इस दौरे के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ब्लॉक अध्यक्ष भोला गोस्वामी के निवास भी पहुंचे, जहां उनका आत्मीय स्वागत हुआ। इस दौरान प्रदेश महामंत्री प्रशांत मिश्रा सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता और स्थानीय कार्यकर्ता मौजूद रहे।

एक जिला, दो गुट और अलग-अलग टाइमिंग: क्या हैं सियासी मायने?

रणनीतिक रूप से कोरबा जिला हमेशा से छत्तीसगढ़ की राजनीति का केंद्र बिंदु रहा है। तीन दिन के भीतर पहले टी. एस. सिंहदेव और फिर भूपेश बघेल का अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचना यह साफ संकेत देता है कि भले ही मंचों से एकजुटता के दावे किए जाएं, लेकिन अंदरूनी तौर पर ‘पॉवर बैलेंस’ और वर्चस्व की सियासी जंग अब भी जारी है।

जहां सिंहदेव गुट ने हसदेव के संवेदनशील मुद्दे पर आदिवासियों को साधने की कोशिश की, वहीं भूपेश बघेल ने ग्रामीण अंचल के ब्लॉक और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच जाकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि संगठन पर आज भी उनकी पकड़ मजबूत है।

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