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माओवादी कमांडर एनकाउंटर मामला: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की SIT जांच की मांग, कहा- ‘हार्डकोर नक्सली का स्वागत गुलदस्ते से नहीं होता’

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नई दिल्ली 24 मई: सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ जंगल में पिछले साल सितंबर में मारे गए माओवादी कमांडर कथा रामचंद्र रेड्डी उर्फ विकल्प की मौत की एसआईटी (SIT) जांच कराने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने मृतक के बेटे राजा चंद्र द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें इस मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए जांच की मांग की गई थी। /आप पद रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज/ जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने फैसला सुनाते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के पिछले आदेश को बरकरार रखा।

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सुनवाई के दौरान कोर्ट की अहम टिप्पणियां:

  • चोटों के निशान पर अदालत का रुख: याचिकाकर्ता के वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने दलील दी कि रेड्डी के शरीर पर चोटों के निशान थे, जो हिरासत में प्रताड़ना की ओर इशारा करते हैं।/ आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज/ इस पर जस्टिस दत्ता ने स्पष्ट किया कि मुठभेड़ के दौरान केवल गोलियां ही नहीं चलतीं, बल्कि आमने-सामने की हाथापाई में भी चोटें आ सकती हैं। जंगलों में अभियान चलाते समय सुरक्षा बलों की जान हमेशा खतरे में रहती है।

  • गुलदस्ते से नहीं होता स्वागत: जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने कहा कि जंगलों में नक्सल विरोधी अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण होते हैं। मृतक एक कट्टर नक्सली था और उसके पास से आधुनिक हथियार मिले थे। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, ‘वहां आपका स्वागत गुलदस्ते से नहीं किया जाएगा।’ कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि अगर मामला किसी आम ग्रामीण का होता, तो स्थिति अलग हो सकती थी।

झारखंड में दो इनामी नक्सली गिरफ्तार:

एक अन्य घटनाक्रम में, झारखंड के लातेहार जिले से पुलिस ने दो प्रतिबंधित नक्सलियों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक झारखंड जन मुक्ति परिषद (JJMP) का उपक्षेत्रीय कमांडर शिव नारायण सिंह उर्फ शिवा है,  / आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज/ जिस पर 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था। दूसरे की पहचान एरिया कमांडर सकलदीप ओरांव के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, शिवा के खिलाफ लातेहार, चतरा और रांची में 24 आपराधिक मामले दर्ज हैं। यह कामयाबी ऐसे समय में मिली है जब हाल ही में 21 मई को 27 माओवादियों ने पुलिस के सामने सरेंडर किया था।

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