The Political Journey of Suvendu Adhikari : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो रही है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सुवेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुनकर यह स्पष्ट कर दिया है कि वे ही बंगाल की कमान संभालेंगे। //आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// नंदीग्राम के संग्राम में ममता बनर्जी को मात देने वाले सुवेंदु अब राज्य के प्रशासनिक प्रमुख की भूमिका में नजर आएंगे।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और जन्म
सुवेंदु अधिकारी का जन्म 15 दिसंबर 1970 को पूर्वी मेदिनीपुर जिले के कांथी में हुआ था। वे एक ऐसे परिवार से आते हैं जिसकी जड़ें बंगाल की राजनीति में बहुत गहरी हैं।
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पिता: उनके पिता शिशिर अधिकारी बंगाल के कद्दावर नेताओं में गिने जाते हैं। वे लगातार तीन बार (2009, 2014 और 2019) लोकसभा सांसद रहे हैं। // आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// उन्होंने ग्रामीण विकास और पंचायती राज जैसी महत्वपूर्ण संसदीय समितियों में भी कार्य किया है।
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माता: उनकी माता का नाम गायत्री अधिकारी है।
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भाई: सुवेंदु के भाई भी राजनीति में सक्रिय हैं। उनके भाई सौमेंदु अधिकारी भाजपा में हैं, जबकि एक अन्य भाई दिब्येंदु अधिकारी भी सांसद रह चुके हैं।
राजनीतिक सफर की शुरुआत
सुवेंदु ने राजनीति के ककहरे अपने घर से ही सीखे थे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1989 में कांग्रेस की छात्र परिषद से की थी।
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चुनौतीपूर्ण दौर: उस समय बंगाल में वामपंथी छात्र संगठनों (SFI) का जबरदस्त प्रभाव था। ऐसे माहौल में एक विपक्षी छात्र नेता के रूप में खुद को स्थापित करना उनकी पहली बड़ी उपलब्धि थी।
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पहला चुनाव: साल 1995 में उन्होंने कांथी नगर पालिका में पार्षद का चुनाव जीतकर अपने चुनावी सफर का औपचारिक आगाज किया।
निजी जीवन और सादगी
सुवेंदु अधिकारी ने अपना पूरा जीवन राजनीति और जनसेवा को समर्पित कर दिया है; उन्होंने विवाह नहीं किया है। चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनकी जीवनशैली काफी सादगी भरी है:
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कुल संपत्ति: नामांकन के समय दी गई जानकारी के मुताबिक, उनकी कुल घोषित संपत्ति लगभग 85.87 लाख रुपये है।
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नकद और वाहन: हलफनामे में उन्होंने केवल 12 हजार रुपये नकद होने की बात कही थी। दिलचस्प बात यह है कि उनके नाम पर कोई निजी कार या स्वर्ण आभूषण दर्ज नहीं है।
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कर्ज: उन पर किसी भी प्रकार की कोई वित्तीय देनदारी या कर्ज नहीं है।
नंदीग्राम का नायक
सुवेंदु अधिकारी को ‘नंदीग्राम आंदोलन’ का असली रणनीतिकार माना जाता है, जिसने 2011 में वामपंथी शासन को उखाड़ फेंकने में मदद की थी। हालांकि, बाद में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। नंदीग्राम सीट पर सीधे मुकाबले में ममता बनर्जी को हराकर उन्होंने खुद को बंगाल का सबसे बड़ा “जमीनी नेता” साबित कर दिया।
निष्कर्ष
विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद सुवेंदु अधिकारी न केवल बंगाल भाजपा के सबसे बड़े चेहरे बनकर उभरे हैं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत की राजनीति में भी उनका कद काफी बढ़ गया है। एक संपन्न राजनीतिक परिवार से आने के बावजूद, छात्र राजनीति के संघर्षों ने उन्हें एक कुशल रणनीतिकार बनाया है।
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