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अपराधियों के आगे बौनी हुई हाईटेक टेक्नोलॉजी? करही हत्याकांड ने खोली  पुलिस के दावों की पोल

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जांजगीर-चांपा/बिलासपुर 9 मई : बिलासपुर रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग ने जब कमान संभाली थी, तब ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ और ‘हाईटेक मॉनिटरिंग’ के नारों से जनता को सुरक्षा का भरोसा दिलाया गया था। दावा था कि “त्रिनयन” और “सशक्त” जैसे आधुनिक ऐप्स और QR कोड तकनीक से अपराधी चंद घंटों में सलाखों के पीछे होंगे। लेकिन जांजगीर-चांपा के बिर्रा थाना अंतर्गत करही गांव में हुए आयुष कश्यप हत्याकांड ने इन तमाम दावों की जमीनी हकीकत को बेनकाब कर दिया है। 15 दिन बीत जाने के बाद भी हाईटेक पुलिसिंग अपराधियों के कदमों के निशान तक नहीं ढूंढ पाई है।

35 जवान, हजार कॉल डिटेल, फिर भी नतीजा ‘सिफर’

23-24 अप्रैल की रात जब नकाबपोश बदमाशों ने कांग्रेस नेता सम्मेलाल कश्यप के घर में घुसकर गोलियां बरसाईं, तो पूरा प्रदेश दहल गया था। 19 साल के मासूम आयुष की मौत हो गई। पुलिस ने जांच का भारी-भरकम तामझाम खड़ा किया— 35 जवानों की स्पेशल टीम, हजारों सीसीटीवी कैमरों की खाक छानी गई और हजारों कॉल डिटेल्स (CDR) खंगाली गईं। लेकिन हकीकत यह है कि इतना डेटा और तकनीक होने के बावजूद पुलिस के हाथ आज भी खाली हैं। क्या खाकी की यह तकनीक सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस और कागजी वाहवाही तक सीमित है?

रेत माफियाओं का रसूख या सिस्टम की लाचारी?

मृतक के पिता सम्मेलाल कश्यप ने चीख-चीख कर कुछ रसूखदार नामों और अवैध रेत उत्खनन के विवाद को हत्या की वजह बताया है। बावजूद इसके, पुलिस की सुई किसी भी बड़े नाम तक नहीं पहुँच सकी है। गांव में चर्चा है कि क्या रसूखदारों के आगे पुलिस की आधुनिक तकनीक ने घुटने टेक दिए हैं?

नेताओं के निर्देश और जनता का आक्रोश

  • विधायक ब्यास कश्यप ने तंज कसते हुए कहा कि आज की पुलिस पाताल से मुजरिम निकालने का दावा करती है, फिर 15 दिन की विफलता समझ से परे है।

  • सांसद कमलेश जांगड़े ने भी कलेक्टर-एसपी को सख्त निर्देश दिए हैं, लेकिन जमीन पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा।

न्याय की गुहार और टूटता भरोसा

पीड़ित परिवार न्याय के लिए आईजी दफ्तर से लेकर राजधानी तक के चक्कर काट रहा है। जिस घर में दो बेटों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब सिर्फ मातम और खौफ है। सवाल खड़ा होता है कि क्या न्याय अब सिर्फ रसूखदारों की जागीर रह गया है? अगर यही घटना किसी वीआईपी परिवार के साथ हुई होती, तो क्या तब भी सिस्टम इसी कछुआ गति से चलता?

निष्कर्ष: करही गोलीकांड पुलिस विभाग के लिए एक चुनौती नहीं, बल्कि एक आईना है। यह आईना दिखाता है कि बिना इच्छाशक्ति के कितनी भी आधुनिक तकनीक आ जाए, वह अपराधियों के हौसलों के आगे बौनी ही साबित होगी।

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