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छत्तीसगढ़: सरकारी कर्मचारियों की ‘राजनीति’ पर लगा बैन 24 घंटे में हटा, सरकार ने अपने ही आदेश पर लिया यू-टर्न

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रायपुर 23 अप्रैल 2026 : छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। राज्य सरकार ने शासकीय कर्मचारियों की राजनीतिक गतिविधियों और संगठनों में पद लेने पर रोक लगाने वाले अपने ही कड़े आदेश को महज 24 घंटे के भीतर स्थगित कर दिया है।

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क्या था वह आदेश?

बीते दिन सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रदेश के सभी विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को एक सख्त पत्र जारी किया था। इसमें Chhattisgarh Civil Services Conduct Rules (छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया था कि:

  • कोई भी शासकीय सेवक किसी राजनीतिक दल या संगठन का सदस्य नहीं बन सकता।

  • प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने पर पूर्णतः प्रतिबंध रहेगा।

  • बिना अनुमति किसी भी अशासकीय संस्था, समिति या संगठन में कोई पद ग्रहण करना वर्जित होगा।

  • नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई और सेवा से बर्खास्तगी तक की चेतावनी दी गई थी।

अचानक यू-टर्न की वजह क्या?

इस आदेश के जारी होते ही कर्मचारी संगठनों और राजनीतिक गलियारों में विरोध की सुगबुगाहट शुरू हो गई थी। माना जा रहा है कि विभिन्न कर्मचारी संघों के दबाव और आगामी रणनीतिक समीकरणों को देखते हुए सरकार ने तत्काल कदम पीछे खींच लिए हैं। विभाग ने एक नया आदेश जारी कर पुराने निर्देशों को “अगले आदेश तक स्थगित” कर दिया है।

इस त्वरित फैसले ने चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है कि क्या सरकार से इस आदेश के ड्राफ्ट में कोई चूक हुई थी, या फिर यह पूरी तरह से कर्मचारी संगठनों के विरोध का परिणाम है। फिलहाल, कर्मचारी अब पहले की तरह ही यथास्थिति में रहेंगे।


प्रमुख बिंदु 

  • 24 घंटे का आदेश: एक ही दिन में आदेश जारी हुआ और अगले दिन स्थगित।

  • प्रशासनिक हलचल: सामान्य प्रशासन विभाग के इस फैसले से ब्यूरोक्रेसी में असमंजस।

  • विवाद की जड़: आचरण नियमों की सख्ती और संगठनों में पद धारण करने पर रोक।

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