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जैसलमेर में ‘स्टोन मैन सिंड्रोम’ का खौफनाक मामला: इंसान का शरीर बन रहा है ‘पत्थर’, मांसपेशियां तब्दील हो रहीं हड्डियों में!

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जैसलमेर | 14 मार्च, 2026 राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर से चिकित्सा जगत को हैरान कर देने वाला एक अत्यंत दुर्लभ मामला सामने आया है। यहां एक बच्चे में FOP (फाइब्रोडिस्प्लेजिया ऑसिफिकेन्स प्रोग्रेसिवा) नामक बीमारी की पुष्टि हुई है, जिसे आम भाषा में ‘स्टोन मैन सिंड्रोम’ कहा जाता है। स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय डॉक्टरों के लिए यह मामला कौतूहल और चिंता दोनों का विषय बना हुआ है। आप पढ़ रहे द खटिया खड़ी न्यूज।

मांसपेशियां बन रही हैं ‘अतिरिक्त कंकाल’

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शहर के वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश जांगिड़ ने बताया कि FOP एक जेनेटिक (आनुवंशिक) और दुनिया की सबसे दुर्लभ बीमारियों में से एक है। इस बीमारी की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें शरीर की मांसपेशियां, लिगामेंट और सॉफ्ट टिश्यू धीरे-धीरे कठोर होकर हड्डियों में बदलने लगते हैं। सरल शब्दों में कहें तो मरीज के शरीर के अंदर एक ‘अतिरिक्त हड्डियों का ढांचा’ बनने लगता है, जो धीरे-धीरे पूरे शरीर को जकड़ लेता है। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।

कैसे पहचानें शुरुआती लक्षण?

डॉ. जांगिड़ के अनुसार, यह बीमारी बचपन में ही दस्तक दे देती है। इसके मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं:

▪️पैर के अंगूठे की बनावट: जन्म के समय पैर के बड़े अंगूठे का असामान्य रूप से छोटा या टेढ़ा होना।▪️अजीब गांठें: शरीर के विभिन्न हिस्सों में दर्दनाक सूजन या छोटी गांठें बनना, जो बाद में हड्डी का रूप ले लेती हैं।▪️गतिशीलता में कमी: गर्दन, कंधों और कूल्हों के जोड़ों का धीरे-धीरे लॉक हो जाना।

इलाज नहीं, सिर्फ सावधानी ही बचाव

चिकित्सा विज्ञान में वर्तमान में इस बीमारी का कोई स्थाई इलाज (Cure) उपलब्ध नहीं है। डॉक्टरों के मुताबिक, इस बीमारी में एक छोटी सी चोट या इंजेक्शन भी मरीज के लिए घातक साबित हो सकता है, क्योंकि चोट वाली जगह पर शरीर तुरंत नई हड्डी बनाना शुरू कर देता है। जैसलमेर का यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यहां के रेतीले और कठिन भौगोलिक परिवेश में मरीज को चोट से बचाए रखना एक बड़ी चुनौती है।

करोड़ों में एक है यह बीमारी

विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी लगभग 15 से 20 लाख लोगों में से किसी एक को होती है। पूरी दुनिया में अब तक इसके केवल 700 से 800 पुष्ट मामले ही सामने आए हैं। भारत में भी ऐसे गिने-चुने केस ही देखे गए हैं। जैसलमेर में इस केस का मिलना चिकित्सा शोध की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


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