रायपुर, 02 मई 2026
एक कुम्हार के हाथों से गढ़ी मिट्टी की सोंधी खुशबू आज सिर्फ बर्तनों तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक आजीविका की मिसाल बन चुकी है। दुर्ग निवासी 27 वर्षीय धन्नू राम चक्रधारी इसी परिवर्तन की जीवंत तस्वीर हैं, जो अपने पारंपरिक हुनर के दम पर न केवल परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय बाजार में अपनी अलग पहचान भी स्थापित कर चुके हैं।
इलेक्ट्रिक चाक से मिली कार्यों को नई गति
अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर प्रदेश सरकार द्वारा श्रमिकों और कारीगरों के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री गजेन्द्र यादव ने कुम्हारों को इलेक्ट्रिक चाक वितरित किए। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों के जीवन में आधुनिकता का समावेश करना है, जिससे उनकी उत्पादकता और आय में वृद्धि हो सके।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
धन्नू राम का जीवन संकल्प की एक प्रेरक कहानी है। कम उम्र में पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद, किसी और नौकरी की तलाश करने के बजाय उन्होंने अपने पुश्तैनी व्यवसाय को ही आगे बढ़ाने का साहसी निर्णय लिया। आज वे अपने परिवार का मजबूत संबल बने हुए हैं।
बाजार में मांग और आय
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उत्पाद: वे सिरसा क्षेत्र से मिट्टी लाकर मटका, सुराही और गुल्लक जैसे पर्यावरण अनुकूल उत्पाद तैयार करते हैं।
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बाजार: दुर्ग के इंदिरा मार्केट में उनके उत्पादों की भारी मांग है।
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कमाई: विशेष रूप से गर्मी के सीजन में बिक्री बढ़ने से वे वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 2 से ढाई हजार रुपये तक की आमदनी कर रहे हैं।
सरकार का आभार
धन्नू राम अपनी इस सफलता का श्रेय अपनी मां के निरंतर सहयोग और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को देते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार के प्रयासों से हर वर्ग के लोगों को स्वरोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त हो रहे हैं।








