Latest News
महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल: क्या फिर एक होंगे उद्धव और शिंदे? एक नेता के बयान से सियासी पारे में उबाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एकता नगर में सरदार पटेल की जयंती पर देश को किया संबोधित, कहा- भारत अब रुकने वाला नहीं छत्तीसगढ़ ने खोया एक जनप्रिय नेता: अहिवारा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा राजकीय सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन CM उमर अब्दुल्ला और वरिष्ठ पत्रकार निधि राजदान बंधे शादी के बंधन में, सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर कर दी खुशखबरी रामलीला मैदान रैली: राहुल गांधी ने मिंटो रोड से अजमेरी गेट तक पैदल यात्रा का किया आह्वान, दिल्ली पुलिस बोली– ‘नहीं मांगी गई मार्च की अनुमति’ छत्तीसगढ़ में अनोखा मामला: DEO ने थाना प्रभारी को थमाया नोटिस, 7 साल तक जेल में बंद रहा शिक्षक और विभाग को भनक तक नहीं लगी!
Home » छत्तीसगढ़ » छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) अधिनियम 2026: जमीन विवादों का निपटारा अब होगा आसान

छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) अधिनियम 2026: जमीन विवादों का निपटारा अब होगा आसान

Share:

रायपु 2 मई 2026 र: छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने प्रदेश के किसानों और आम जनता को बड़ी राहत देते हुए छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2026 को मंजूरी दे दी है। इस ऐतिहासिक फैसले से वर्षों पुरानी जटिल कानूनी प्रक्रिया अब सरल और सुगम हो जाएगी।


प्रमुख बदलाव और उनके लाभ:

  • कलेक्टर कोर्ट में सीधी अपील: अब एसडीएम (SDM) स्तर पर विवाद न सुलझने पर सीधे जिला कलेक्टर के पास अपील की जा सकेगी। पहले इसके लिए संभागीय कमिश्नर कार्यालय जाना पड़ता था।

  • समय और धन की बचत: ग्रामीणों और किसानों को अब संभाग मुख्यालयों (जो अक्सर 30-50 किमी दूर होते थे) के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। प्रक्रिया जिले के भीतर ही पूरी होने से परिवहन और कानूनी खर्च कम होगा।

  • समय सीमा तय: नए कानून के तहत जमीन विवादों का निपटारा 30 से 90 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा।

  • जवाबदेही और पारदर्शिता: सुनवाई में अनावश्यक देरी करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार होगा।

  • निवेश को बढ़ावा: संशोधित धारा 59 के तहत औद्योगिक भूमि को पुनर्मूल्यांकन से छूट दी गई है, जिससे राज्य में व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।


प्रशासनिक निर्देश:

राज्य शासन ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि वे नए कानून के आधार पर लंबित मामलों की सूची तैयार करें और त्वरित सुनवाई शुरू करें।

।।m

latest news