Sports News : भारतीय क्रिकेट टीम ने पिछले तीन वर्षों में जो कर दिखाया है, वह किसी करिश्मे से कम नहीं है। 2023 वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में मिली वो एक हार शायद टीम इंडिया के लिए एक नई शुरुआत की तरह थी। उसके बाद से नीली जर्सी वाली इस टीम ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। लेकिन, क्या आपने गौर किया है कि इन जीतों के पीछे एक ऐसा चेहरा है जो न तो मैदान पर दिखता है और न ही हेडलाइंस में, फिर भी उसकी हर चाल ‘शह और मात’ वाली रही है?

हम बात कर रहे हैं मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर की।

अजीत अगरकर: जीत के ‘साइलेंट आर्किटेक्ट’
जब अगरकर ने मुख्य चयनकर्ता का पद संभाला था, तब चुनौतियां पहाड़ जैसी थीं। लेकिन उनके कार्यकाल में भारत ने क्रिकेट की दुनिया पर अपना एकाधिकार जमा लिया है।

पिछले 3 सालों में भारत की झोली में 3 बड़ी ICC ट्रॉफियां आई हैं:
-
ICC टी-20 वर्ल्ड कप 2024
-
ICC चैंपियंस ट्रॉफी 2025
-
ICC टी-20 वर्ल्ड कप 2026 (सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में)
वो कड़े फैसले जिन्होंने बदली किस्मत

अगरकर की आलोचना करना आसान है, लेकिन उनके कड़े फैसलों की तारीफ में कंजूसी क्यों?
-
सूर्या का दांव: टी-20 वर्ल्ड कप 2024 के बाद हार्दिक पांड्या के बजाय सूर्यकुमार यादव को कप्तानी सौंपना एक ऐसा जोखिम भरा फैसला था, जिस पर कई सवाल उठे। आज परिणाम सबके सामने है।
-
ईशान किशन की वापसी: 2026 वर्ल्ड कप में अचानक ईशान किशन को टीम में शामिल करना मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ।
-
स्पिनर्स पर भरोसा: चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में पिच की कंडीशन को भांपते हुए एक्स्ट्रा स्पिनर्स को मौका देना अगरकर की दूरदर्शिता का ही प्रमाण था।
ट्रॉलिंग में आगे, तारीफ में पीछे?
विडंबना यह है कि जब टीम हारती है, तो सबसे पहले सोशल मीडिया पर अजीत अगरकर को निशाना बनाया जाता है। लेकिन आज जब भारत ने लगातार तीन आईसीसी इवेंट्स जीतकर इतिहास रचा है, तो इस ‘गुमनाम हीरो’ का नाम लेने वाला कोई नहीं है। क्या यह चयनकर्ता के साथ नाइंसाफी नहीं है?
मैदान पर चौके-छक्के खिलाड़ी लगाते हैं, लेकिन उन खिलाड़ियों को चुनने और उन पर भरोसा जताने का जिम्मा जिस ‘विज़न’ का होता है, वह अजीत अगरकर ने बखूबी निभाया है।
।।।








