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रायपुर का पहला ‘पुलिस कमिश्नर’ कौन? 23 जनवरी से लागू होगा नया सिस्टम; अमरेश मिश्रा, सुंदरराज पी. और संजीव शुक्ला के बीच कड़ी टक्कर

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“The Race for Raipur’s First Police Commissioner: Amresh Mishra, Sundarraj P., and Sanjeev Shukla lead the frontrunners as new system begins Jan 23.”

रायपुर, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कानून-व्यवस्था के एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 23 जनवरी से रायपुर में ‘पुलिस कमिश्नर प्रणाली’ (Police Commissionerate System) लागू करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। इस घोषणा के साथ ही गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह तैर रहा है कि रायपुर का पहला ‘सुपरकॉप’ यानी पुलिस कमिश्नर कौन बनेगा?

चूँकि यह पद आईजी (IG) रैंक के अधिकारी का होगा, इसलिए रेस में प्रदेश के तीन सबसे कद्दावर आईपीएस अधिकारियों के नाम सबसे आगे हैं। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।

आईजी अमरेश मिश्रा: पलड़ा सबसे भारी

वर्तमान में रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा (2005 बैच) को इस पद का सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है।

  • मजबूत पक्ष: वे पहले रायपुर के एसपी रह चुके हैं, जिससे उन्हें शहर की रग-रग का पता है।

  • प्रोफाइल: IIT धनबाद से शिक्षित और ऑक्सफोर्ड-हार्वर्ड से डिग्री धारक मिश्रा 5 साल तक NIA में अहम भूमिका निभा चुके हैं। वर्तमान में उनके पास ACB और EOW की भी कमान है।

आईजी सुंदरराज पी.: अनुभव का बड़ा चेहरा

बस्तर में नक्सलियों के दांत खट्टे करने वाले आईजी सुंदरराज पी. (2003 बैच) का नाम भी चर्चाओं में है।

  • मजबूत पक्ष: उनकी कार्यशैली और विपरीत परिस्थितियों में बेहतर प्रबंधन उन्हें एक भरोसेमंद अधिकारी बनाता है।

  • प्रोफाइल: तमिलनाडु के मूल निवासी सुंदरराज को हाल ही में ‘केंद्रीय गृहमंत्री दक्षता पदक’ से नवाजा गया है। वे लंबे समय से बस्तर जैसे संवेदनशील जोन को सफलतापूर्वक संभाल रहे हैं।

आईजी डॉ. संजीव शुक्ला: जमीनी पुलिसिंग के माहिर

बिलासपुर आईजी डॉ. संजीव शुक्ला (2004 बैच) भी इस रेस में मजबूती से डटे हुए हैं।

  • मजबूत पक्ष: राज्य पुलिस सेवा से IPS बने संजीव शुक्ला के पास जमीनी पुलिसिंग और प्रशासन का लंबा अनुभव है।

  • प्रोफाइल: अनुशासन और सादगी के लिए पहचाने जाने वाले शुक्ला मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों में अहम पदों पर रहे हैं।

क्या बदलेगा रायपुर में?

23 जनवरी के बाद रायपुर पुलिस के पास मजिस्ट्रियल शक्तियां आ जाएंगी। अब लाठीचार्ज, धारा 144 लागू करने, गुंडा एक्ट लगाने और लाइसेंस जारी करने जैसे फैसलों के लिए पुलिस को कलेक्टर (DM) की अनुमति का इंतजार नहीं करना होगा।आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।

 जहाँ अमरेश मिश्रा का स्थानीय अनुभव उन्हें रेस में आगे रखता है, वहीं सुंदरराज पी. और संजीव शुक्ला की वरिष्ठता और ट्रैक रिकॉर्ड को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री की अंतिम मुहर पर टिकी हैं।

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