राजोल (आंध्र प्रदेश): आंध्र प्रदेश के कोनासीमा जिले का इरुसुमंडा गांव सोमवार को किसी दुस्वप्न की तरह जाग उठा। यहाँ स्थित ONGC के एक तेल कुएं में मरम्मत के दौरान हुए जोरदार धमाके ने न केवल धरती को दहला दिया, बल्कि सैकड़ों फीट ऊंची आग की लपटों ने आसमान को भी काला कर दिया। इस भयावह मंजर को देख ग्रामीणों में चीख-पुकार मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए बदहवास होकर सुरक्षित स्थानों की ओर दौड़ पड़े।
मरम्मत के दौरान ‘पाताल’ से निकली आग
जानकारी के मुताबिक, कुएं में नियमित मेंटेनेंस का काम चल रहा था, तभी अचानक तकनीकी खराबी के कारण कच्चे तेल और गैस का भारी रिसाव शुरू हो गया। पलक झपकते ही गैस ने आग पकड़ ली और पूरा इलाका आग के गोले में तब्दील हो गया। धुएं का गुबार इतना घना था कि कई किलोमीटर दूर से ही तबाही का मंजर साफ दिखाई दे रहा था।
लाउडस्पीकर पर गूंजी चेतावनी, अंधेरे में डूबा इलाका
प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ‘क्विक एक्शन’ लिया। इरुसुमंडा सहित आसपास के तीन गांवों को तुरंत खाली कराने के आदेश दिए गए।
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मुनादी: पुलिस ने लाउडस्पीकर के जरिए लोगों को घरों से बाहर निकलने की हिदायत दी।
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ब्लैकआउट: किसी भी बड़े हादसे को टालने के लिए पूरे क्षेत्र की बिजली काट दी गई है।
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कड़ी हिदायत: ग्रामीणों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे माचिस या गैस चूल्हे का प्रयोग बिल्कुल न करें।
मवेशियों को लेकर खेतों की ओर भागे ग्रामीण
खौफ का आलम यह था कि लोग अपने बुजुर्गों, बच्चों और मवेशियों को लेकर खेतों की ओर भागते नजर आए। गांव की गलियां खाली हो गईं और चारों तरफ केवल आग की गड़गड़ाहट सुनाई दे रही थी। प्रशासन ने विस्थापितों के लिए राहत शिविर (Relief Camps) बनाए हैं।
एक्सपर्ट्स के सामने कड़ी चुनौती
ONGC की तकनीकी टीमें और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर मोर्चा संभाले हुए हैं। हालांकि, गैस का अत्यधिक दबाव आग बुझाने के काम में बड़ी बाधा बना हुआ है।
अधिकारियों का पक्ष: “हमारी पहली प्राथमिकता इंसानी जान बचाना है। फिलहाल किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन स्थिति चुनौतीपूर्ण है। हम गैस के दबाव को कम करने का प्रयास कर रहे हैं।”








