नई दिल्ली | कांग्रेस के 141वें स्थापना दिवस से ठीक पहले पार्टी के भीतर एक बड़ा वैचारिक और संगठनात्मक घमासान छिड़ गया है। वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सीधे तौर पर संगठन की कमजोरी को निशाने पर लेते हुए पार्टी नेतृत्व को आईना दिखाया है। CWC की बैठक में सिंह ने न केवल आरएसएस (RSS) के जमीनी ढांचे की तारीफ की, बल्कि यह कहकर सनसनी फैला दी कि कांग्रेस के अंदर ही कई ‘स्लीपर सेल’ सक्रिय हैं।”आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज”

RSS का डर और राहुल को ‘विकेंद्रीकरण’ की सलाह

दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया से लेकर बैठक के भीतर तक इस बात पर जोर दिया कि बीजेपी और आरएसएस जैसे “खतरनाक” संगठनों से लड़ने के लिए कांग्रेस का वार्ड स्तर तक मजबूत होना जरूरी है। उन्होंने राहुल गांधी को टैग करते हुए संगठन के ‘विकेंद्रीकरण’ की वकालत की। सियासी गलियारों में इसे संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की कार्यशैली पर परोक्ष हमले के रूप में देखा जा रहा है, जिसे अब ‘दिग्विजय बनाम केसी’ की जंग कहा जा रहा है।”आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज”
खरगे की नसीहत: “भारत की तुलना बांग्लादेश से न करें”

सूत्रों के मुताबिक, बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे ने कड़ा रुख अपनाते हुए दिग्विजय सिंह और शशि थरूर दोनों को टोका। खरगे ने दिग्विजय से स्पष्ट कहा कि भारत की घटनाओं की तुलना बांग्लादेश से करना पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाता है। वहीं, थरूर को विदेश नीति पर चुप रहने के बजाय खामियां उजागर करने की हिदायत दी गई।”आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज”
प्रियंका गांधी को बड़ी भूमिका की सुगबुगाहट

बैठक में दिग्विजय ने जिस तरह स्लीपर सेल और संगठनात्मक सुस्ती का मुद्दा उठाया, उसे प्रियंका गांधी को संगठन में बड़ी और स्पष्ट जिम्मेदारी देने की मांग से जोड़कर देखा जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि आगामी 5 जनवरी से शुरू होने वाले ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ का खाका भी प्रियंका गांधी ने ही तैयार किया है। “आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज”
सवालों से बचते नजर आए राहुल-खरगे

बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में खरगे और राहुल गांधी ने सरकार पर तो तीखे हमले किए, लेकिन दिग्विजय सिंह के बयानों से जुड़े सवालों से बचने के लिए वे सवाल-जवाब सत्र से पहले ही चले गए। दिग्विजय ने बाद में सफाई दी कि उन्होंने आरएसएस की विचारधारा नहीं, बल्कि उसके ढांचे की बात की थी और वे इसके कट्टर विरोधी हैं।








