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बीजेपी के ‘नितिन’ से कांग्रेस को आस: बघेल के दावे में कितना दम या बस एक सियासी ‘भ्रम’?

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Bhupesh Baghel’s ‘Nitin’ connection: भारतीय जनता पार्टी को आखिरकार अपना नया सारथी मिल गया है। नितिन नबीन को पार्टी का नया कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जिसके बाद उन्होंने बिहार सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा भी दे दिया है। बीजेपी के इस फैसले से जहां भगवा खेमे में हलचल है, वहीं एक अजीबोगरीब खुशी कांग्रेस के खेमे में देखी जा रही है।

भूपेश बघेल का ‘नितिन’ कनेक्शन और शुभ संकेत

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नितिन नबीन की नियुक्ति को कांग्रेस के लिए ‘लकी चार्म’ करार दिया है। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान मीडिया से बात करते हुए बघेल ने एक दिलचस्प तर्क पेश किया। उन्होंने कहा:

“नितिन नबीन का अध्यक्ष बनना हमारे लिए शुभ संकेत है। इससे पहले जब नितिन गडकरी बीजेपी अध्यक्ष बने थे, तब केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनी थी और हमारे ‘चरण भैया’ (चरणदास महंत) मंत्री बने थे। अब फिर एक ‘नितिन’ आए हैं, तो संकेत साफ है कि केंद्र में दोबारा हमारी सरकार बनेगी।”

तथ्यों की कसौटी पर बघेल का दावा

बघेल के इस उत्साहजनक दावे में एक बड़ी तकनीकी चूक है। यदि हम इतिहास के पन्नों को पलटें, तो आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं:

  • नितिन गडकरी का कार्यकाल: गडकरी 1 जनवरी 2010 को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे और 22 जनवरी 2013 तक इस पद पर रहे।

  • चुनाव का गणित: गडकरी के अध्यक्ष बनने से पहले ही 2009 के लोकसभा चुनाव संपन्न हो चुके थे और मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए-2 की सरकार बन चुकी थी।

  • अगला चुनाव: गडकरी के पद छोड़ने के बाद 2014 में लोकसभा चुनाव हुए, जिसमें बीजेपी ने प्रचंड बहुमत हासिल किया और कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई।

 साफ है कि नितिन गडकरी के कार्यकाल के दौरान न तो केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनी और न ही कोई आम चुनाव आयोजित हुए। ऐसे में भूपेश बघेल का ‘नितिन’ वाला संयोग महज एक राजनीतिक बयानबाजी और तथ्यों से परे दावा नजर आता है।

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