कोरबा, 16 दिसंबर। आज औद्योगिक नगरी कोरबा का कोना-कोना त्याग, तपस्या और वैराग्य के रंग में रंगा नजर आया। संसार की मोह-माया को त्यागकर संयम पथ पर कदम रखने वाले 8 मुमुक्षु भाई-बहनों के नगर आगमन ने पूरे सकल जैन समाज को भक्ति और गौरव से भर दिया। मंगलवार का यह दिन कोरबा के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया।
भव्य वरघोड़ा: बग्घियों पर सवार होकर निकले ‘संयम के सिपाही’


सुबह टी.पी. नगर स्थित पाटीदार भवन से जब श्री मुनिसुव्रत स्वामी जैन मंदिर तक वरघोड़ा निकला, तो नजारा अलौकिक था। सुसज्जित बग्घियों पर सवार इन पुण्यात्माओं को देखने के लिए शहर की सड़कों पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा।
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गूंजते जयकारे: ‘दीक्षा ले लो रे, वीर की दीक्षा ले लो रे’ के जयकारों और भक्तिमय भजनों से पूरा टी.पी. नगर गुंजायमान हो उठा।
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भक्ति में डूबा शहर: समाज के हर वर्ग—महिला, पुरुष, बच्चे और बुजुर्गों ने नाचते-गाते हुए दीक्षार्थियों की अनुमोदना की।

इन 8 महामानवों ने चुनी कांटों भरी राह
सांसारिक सुखों को पीछे छोड़, मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ने वाले इन दीक्षार्थियों में 13 साल के बालक से लेकर 49 साल के अनुभवी साधक तक शामिल हैं:
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शैलेन्द्र सकलेचा (49 वर्ष) एवं एकता सकलेचा (47 वर्ष)
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आशीष सुराना (42 वर्ष), रितु सुराना (40 वर्ष), आर्यन सुराना (16 वर्ष) एवं आदित्य सुराना (14 वर्ष)
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सुकृति बैसाली (26 वर्ष) एवं तनीष सोनिगरा (13 वर्ष)
पलक-पांवड़े बिछाकर हुआ भावभीना बहुमान
वरघोड़े के बाद पाटीदार भवन में आयोजित समारोह में श्रद्धा का समंदर उमड़ पड़ा। समाज के वरिष्ठजनों ने तिलक लगाकर और शॉल ओढ़ाकर दीक्षार्थियों का सम्मान किया।
वक्ताओं का संदेश: “भरे-पूरे परिवार और सुख-सुविधाओं के बीच इतनी कम उम्र में संयम का मार्ग चुनना असाधारण साहस है। यह पूरे समाज के लिए अनुकरणीय है।”
सामूहिक गौतम प्रसादी से समापन
समारोह का समापन सामूहिक गौतम प्रसादी (स्वरुचि भोज) के साथ हुआ। आयोजन समिति ने इस पूरे कार्यक्रम को सफल और ऐतिहासिक बनाने के लिए सभी स्वधर्मी बंधुओं का हृदय से आभार व्यक्त किया।










