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एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल: खून से लिखा पत्र भेजकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश

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रायगढ़ छत्तीसगढ़:राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारियों ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। यह हड़ताल 18 अगस्त से जारी है और अब 20वें दिन में प्रवेश कर गई है। कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं।

खून से लिखा पत्र: कर्मचारियों का अनोखा विरोध
एनएचएम कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और वित्त मंत्री को अपने खून से लिखा पत्र भेजकर अपनी मांगों को दोहराया है। इस प्रतीकात्मक विरोध के जरिए उन्होंने यह संदेश दिया है कि उनकी मांगे पूरी न होने से वे कितने आहत हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यह केवल पानी नहीं, बल्कि उनका जुनून और समर्पण है, जो खून के रूप में बाहर आ रहा है।

हड़ताल के कारण
एनएचएम कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमित मिरी ने बताया कि कर्मचारी बीते 20 वर्षों से नियमितीकरण और अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सरकारें केवल आश्वासन दे रही हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांगें हैं ।
नियमितीकरण और स्थायीकरण: अन्य राज्यों की तरह छत्तीसगढ़ में भी कर्मचारियों को स्थायी किया जाए।
ग्रेड पे का निर्धारण: समान काम के लिए समान वेतन की नीति लागू हो।
पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना: स्वास्थ्य सेवाओं में स्थायीत्व लाने के लिए एक अलग कैडर बनाया जाए।
नियमित भर्ती में आरक्षण: भर्ती में 50% सीटें एनएचएम कर्मियों के लिए आरक्षित हों।
अनुकंपा नियुक्ति: ड्यूटी के दौरान मृत कर्मचारियों के परिजनों को नौकरी दी जाए।

हड़ताल का असर
हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। ग्रामीण इलाकों में टीकाकरण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हो रही हैं। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे हड़ताल को और सख्त करेंगे ²।

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