Latest News
छत्तीसगढ़ में अनोखा मामला: DEO ने थाना प्रभारी को थमाया नोटिस, 7 साल तक जेल में बंद रहा शिक्षक और विभाग को भनक तक नहीं लगी! 4 करोड़ का कैश, सीक्रेट चेंबर और कोर्ट का झटका: छत्तीसगढ़ के चर्चित कैश जब्ती मामले में आया नया मोड़! लौह पुरुष सरदार पटेल की जयंती पर गूंजा राष्ट्रीय एकता का संकल्प, मंत्री लखन लाल देवांगन व भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने अर्पित किए श्रद्धासुमन चक्रवात ‘अर्नब’ का कहर: छत्तीसगढ़ में प्रभावित किसानों को जल्द मिलेगी राहत, सीएम साय ने दिए सर्वे के निर्देश छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे के बाद सियासी घमासान: सुधांशु त्रिवेदी बोले— ‘जंगल से नक्सलवाद गया, पर दिल्ली में ‘दिमागी नक्सल’ बाकी’ रात को सोते समय पैरों के तलवों में जलन क्यों होती है? जानिए कारण, राहत के उपाय और कब लें डॉक्टर की सलाह
Home » व्यवसाय » भारतीय ऑटो बाजार: कार चुनने से ज्यादा मुश्किल हुआ सही वैरिएंट का चुनाव, 2021 से अब तक 56% बढ़े विकल्प

भारतीय ऑटो बाजार: कार चुनने से ज्यादा मुश्किल हुआ सही वैरिएंट का चुनाव, 2021 से अब तक 56% बढ़े विकल्प

Share:

Indian Auto Industry : नई कार खरीदते समय अब सिर्फ मॉडल पसंद करना काफी नहीं है, बल्कि असली चुनौती उसका सही वैरिएंट चुनने में आ रही है। सनरूफ, बड़ी टचस्क्रीन और एडवांस्ड सेफ्टी फीचर्स के बीच सही संतुलन बनाना ग्राहकों के लिए पेचीदा साबित हो रहा है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) सिस्टमैटिक्स रिसर्च (Systematix Research) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2021 के बाद से भारतीय बाजार में पैसेंजर व्हीकल्स (PVs) के वैरिएंट्स की संख्या में 56 फीसदी का बड़ा उछाल आया है, जो बढ़कर अब 1,923 हो गई है। इसके उलट, इस दौरान कार मॉडलों की संख्या में केवल 8 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है।

वैरिएंट अपग्रेड पर 50,000 से 75,000 रुपये का अतिरिक्त खर्च

एक ही मॉडल के इतने सारे विकल्प देने से ग्राहकों के सामने फैसला लेना मुश्किल हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, किसी कार के एक बेस या लोअर वैरिएंट से उससे ऊपर के वैरिएंट पर शिफ्ट होने के लिए ग्राहक को औसतन ₹50,000 से ₹75,000 तक अतिरिक्त चुकाने पड़ते हैं। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) ऐसे में ग्राहकों को यह सोचना पड़ रहा है कि गिने-चुने प्रीमियम फीचर्स के लिए इतने ज्यादा पैसे खर्च करना उनके बजट और जरूरत के हिसाब से सही है या नहीं।

डीलरों के सामने इन्वेंट्री और वर्किंग कैपिटल का संकट

वैरिएंट्स की बढ़ती संख्या से सिर्फ ग्राहक ही नहीं, बल्कि कार डीलरशिप्स भी परेशान हैं।

  • ज्यादा स्टॉक का दबाव: हर वैरिएंट को शोरूम या यार्ड में बनाए रखने के लिए डीलरों को ज्यादा इन्वेंट्री रखनी पड़ रही है।

  • वर्किंग कैपिटल पर असर: अधिक गाड़ियां होल्ड करने से डीलरों की कामकाजी पूंजी (Working Capital) फंस रही है।

  • कंपनियों में होड़: ऑटो मेकर्स के बीच एक-दूसरे से बेहतर और ज्यादा फीचर्स देने की प्रतिस्पर्धा के चलते भी नए वैरिएंट्स की बाढ़ आ रही है।

📍