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यूपी को 4 साल बाद मिला ‘स्थायी’ कप्तान: कार्यवाहक के खेल पर लगा ब्रेक, क्या 60 दिन के लिए बने देव कुमार DGP?

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे में पिछले चार साल से चल रहा ‘कार्यवाहक-कार्यवाहक’ का खेल आखिरकार खत्म हो गया है। योगी सरकार ने लंबी खींचतान और विपक्ष के तीखे हमलों के बाद प्रदेश को परमानेंट डीजीपी दे दिया है। 1994 बैच के कड़क आईपीएस अधिकारी एल.वी. एंटनी देव कुमार अब यूपी पुलिस की कमान संभालेंगे।

राज्यपाल की मुहर, संजय प्रसाद का आदेश राजभवन से हरी झंडी मिलते ही अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद ने आदेश पर दस्तखत कर दिए हैं। गृह विभाग के आदेश संख्या- 247 के मुताबिक, देव कुमार को पे-मैट्रिक्स लेवल-16 (करीब 2.25 लाख रुपये वेतन) पर प्रमोट किया गया है। बड़ी बात यह है कि यह प्रमोशन 1 मार्च 2026 से ही प्रभावी मान लिया गया है। यानी अब तक जो कुर्सी ‘उधार’ के कंधों पर थी, उसे अब अपना असली मालिक मिल गया है।

4 साल का सूखा खत्म, राजीव कृष्ण की विदाई! बता दें कि साल 2022 से यूपी पुलिस बिना किसी स्थायी मुखिया के चल रही थी। प्रशांत कुमार के रिटायर होने के बाद राजीव कृष्ण कार्यवाहक के तौर पर गाड़ी खींच रहे थे। सरकार पर लगातार सवाल उठ रहे थे कि आखिर देश के सबसे बड़े सूबे को परमानेंट डीजीपी क्यों नहीं मिल रहा? अब देव कुमार की ताजपोशी ने उन तमाम सवालों पर ताला जड़ दिया है।

चुनौतियां पहाड़ जैसी, वक्त है कम! तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में जन्मे देव कुमार इतिहास और राजनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं। सीबीसीआईडी और एसएसएफ जैसे विभागों में लोहा मनवा चुके देव कुमार के सामने अब पंचायत चुनाव और विधानसभा उपचुनाव की अग्निपरीक्षा है। लेकिन असली सस्पेंस तो उनके कार्यकाल को लेकर है।

60 दिन का ‘खेला’ या मिलेगा सेवा विस्तार? चर्चाओं का बाजार इसलिए भी गर्म है क्योंकि देव कुमार की 60 साल की उम्र 28 मई 2026 को पूरी हो रही है। यानी कायदे से उनके पास सिर्फ दो महीने का वक्त है। अब सवाल यह है कि क्या सरकार ने उन्हें सिर्फ ‘स्टॉप-गैप’ अरेंजमेंट के लिए परमानेंट किया है या फिर उन्हें लंबा सेवा विस्तार देकर चौंकाने वाली है?


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