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ईरान-इजराइल युद्ध की आग में झुलसा दलाल स्ट्रीट: 2 दिन में ₹11 लाख करोड़ स्वाहा

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नई दिल्ली: जियो-पॉलिटिकल तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने भारतीय शेयर बाजार की कमर तोड़ दी है। सोमवार और मंगलवार के कारोबारी सत्रों में भारी बिकवाली के कारण BSE Sensex और Nifty 50 में 2.5% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।

बाजार में गिरावट की 3 बड़ी वजहें

  1. ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत: रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और इजराइल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद खाड़ी देशों में स्थिति बेहद विस्फोटक हो गई है।

  2. कच्चे तेल में उबाल: तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें उछलकर $77-$80 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतें अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा हैं।

  3. FII की बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालना तेज कर दिया है, जिससे गिरावट को और हवा मिली है।

प्रमुख आंकड़े एक नजर में

सूचकांक (Index) गिरावट (Points) वर्तमान स्तर
BSE Sensex 1,000+ अंक 80,239 (81,000 के नीचे)
NSE Nifty 50 300+ अंक 24,866 (25,000 के नीचे)
निवेशकों का घाटा ₹11 लाख करोड़ (दो सत्रों में)

क्या और गिरावट का खतरा है?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन काफी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं:

  • निकट अवधि (Short Term): जब तक ईरान और इजराइल के बीच युद्ध शांत नहीं होता, बाजार “हेडलाइन-ड्रिवन” रहेगा। यानी युद्ध की खबरों के आधार पर बाजार ऊपर-नीचे होता रहेगा।

  • तकनीकी स्तर: निफ्टी के लिए 24,600 एक महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल है। अगर यह टूटता है, तो गिरावट और गहरी हो सकती है।

  • लंबी अवधि (Long Term): विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के आर्थिक बुनियादी ढांचे (Fundamentals) मजबूत हैं। यदि तनाव और नहीं बढ़ता है, तो बाजार जल्द ही स्थिरता की ओर बढ़ सकता है।

निवेशकों के लिए सलाह: घबराहट में आकर बिकवाली (Panic Selling) न करें। अपनी पोर्टफोलियो की गुणवत्ता जांचें और केवल उन्हीं शेयरों में बने रहें जिनके फंडामेंटल मजबूत हैं।

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