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बड़ी खबर: केरल अब होगा ‘केरलम’, मोदी कैबिनेट ने नाम बदलने के प्रस्ताव को दी मंजूरी

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में एक ऐतिहासिक फैसले पर मुहर लगा दी गई है। केंद्र सरकार ने केरल विधानसभा द्वारा पारित उस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है, जिसमें राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की सिफारिश की गई थी।

क्यों बदला जा रहा है नाम?

केरल सरकार और वहां की विधानसभा का तर्क है कि मलयालम भाषा में राज्य को ‘केरलम’ ही कहा जाता है, जबकि अन्य भाषाओं और आधिकारिक दस्तावेजों में यह ‘केरल’ दर्ज है। अपनी सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को वैश्विक पटल पर मजबूती से रखने के लिए राज्य ने यह कदम उठाया है।

कैसे पूरी होगी प्रक्रिया? (संवैधानिक प्रावधान)

कैबिनेट की मंजूरी इस प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन अभी अंतिम मुहर लगना बाकी है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत किसी राज्य का नाम बदलने की शक्ति संसद के पास सुरक्षित है:

  1. राष्ट्रपति की सिफारिश: कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब फाइल राष्ट्रपति के पास जाएगी।

  2. संसद में विधेयक: राष्ट्रपति की सिफारिश के बाद संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में एक विधेयक पेश किया जाएगा।

  3. साधारण बहुमत: इस विधेयक को साधारण बहुमत से पारित होना अनिवार्य है। इसके लिए अनुच्छेद 368 के तहत विशेष संविधान संशोधन की आवश्यकता नहीं होती।

  4. पहली अनुसूची में बदलाव: संसद से पारित होने और राष्ट्रपति के अंतिम हस्ताक्षर के बाद संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन किया जाएगा और आधिकारिक तौर पर नाम बदल जाएगा।

चुनावों से पहले बढ़ा सियासी पारा

राज्य में अप्रैल-मई 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव से ठीक पहले केंद्र द्वारा इस प्रस्ताव को हरी झंडी दिए जाने को काफी अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से राज्य की अस्मिता और भाषाई गौरव का मुद्दा चुनाव में हावी रह सकता है।

मुख्य बात: नाम बदलने की प्रक्रिया अब औपचारिकता के अंतिम चरणों में है। जल्द ही देश के मानचित्र पर ‘केरल’ की जगह ‘केरलम’ लिखा दिखाई देगा।

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