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⚡ दिल्ली में सियासी भूचाल: क्या देश के अगले ‘डिप्टी पीएम’ होंगे अमित शाह? राजनाथ सिंह और 6 मंत्रियों को लेकर बड़ी भविष्यवाणी!

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राजनाथ सिंह के राष्ट्रपति बनने की अटकलों से लखनऊ से दिल्ली तक सियासी हलचल तेज

नई दिल्ली 3 जुलाई : दिल्ली के सियासी गलियारों में इस समय हलचल चरम पर है। मानसून सत्र से पहले मोदी सरकार के केंद्रीय मंत्रिमंडल में एक बहुत बड़े और रणनीतिक फेरबदल की संभावना जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम का खाका लगभग तैयार हो चुका है और सिर्फ आधिकारिक ऐलान होना बाकी है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) लेकिन असली सस्पेंस कैबिनेट को लेकर बना हुआ है। राजनीतिक पंडितों का दावा है कि साल 2019 के बाद पहली बार सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी (CCS) में बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।

धर्मेंद्र प्रधान और हरदीप पुरी समेत 6 मंत्रियों की छुट्टी संभव!

चर्चा है कि इस आगामी फेरबदल में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत छह केंद्रीय मंत्रियों को हटाया जा सकता है। सरकार इस फेरबदल के जरिए संगठन और सरकार में नए चेहरों को मौका देकर एक नया संतुलन बनाने की कोशिश में है।

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क्या देश के अगले राष्ट्रपति बनेंगे राजनाथ सिंह?

सीनियर जर्नलिस्ट और पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रदीप सिंह के विश्लेषण के मुताबिक, आगामी कैबिनेट फेरबदल में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को एक नई और सर्वोच्च भूमिका दी जा सकती है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) कयास हैं कि साल 2027 में मौजूदा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का कार्यकाल पूरा होने के बाद, बीजेपी राजनाथ सिंह को देश के अगले राष्ट्रपति के रूप में मैदान में उतार सकती है।

इसके पीछे के 3 मुख्य समीकरण:

  • सर्वस्वीकार्यता और बेदाग छवि: राजनाथ सिंह की साफ-सुथरी छवि और विपक्ष व एनडीए सहयोगियों में उनका सम्मान उन्हें इस सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार बनाता है।

  • लखनऊ सीट का गणित: यदि राजनाथ सिंह राष्ट्रपति बनते हैं, तो उनकी पारंपरिक लखनऊ लोकसभा सीट उनके छोटे बेटे नीरज सिंह के लिए खाली की जा सकती है।

  • शानदार करियर का मुकम्मल अंत: यूपी के सीएम, बीजेपी अध्यक्ष, गृह मंत्री और रक्षा मंत्री जैसे पदों पर रहने के बाद राष्ट्रपति का पद उनके राजनीतिक सफर को एक मुकम्मल पूर्णता देगा, (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) ठीक वैसे ही जैसे प्रणब मुखर्जी को मिली थी।

विपक्ष का हमला: इस बीच, कांग्रेस ने राजनाथ सिंह पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के शहीदों को लेकर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया है। पार्टी उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने और इस्तीफे की मांग कर रही है, जिस पर बीजेपी ने रणनीतिक चुप्पी साध रखी है।

अमित शाह: क्या बनेंगे देश के नए उपप्रधानमंत्री?

 

राजनीतिक गलियारों में दूसरी सबसे बड़ी चर्चा गृह मंत्री अमित शाह को लेकर है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस फेरबदल में अमित शाह को प्रमोट करके देश का उपप्रधानमंत्री (Deputy PM) बनाया जा सकता है।

इस संभावना के दो पहलू हैं:

  • उत्तराधिकारी का संदेश: अमित शाह को डिप्टी पीएम घोषित करने का मतलब होगा कि उन्हें आधिकारिक तौर पर पीएम मोदी का उत्तराधिकारी मान लिया गया है, जो कार्यकर्ताओं को मजबूत संदेश देगा।

  • पॉलिटिकल रिस्क: इसका एक नुकसान यह हो सकता है कि 2029 के लिहाज से विपक्ष अधिक एकजुट हो सकता है, और देश भर में योगी आदित्यनाथ के समर्थकों में भी नाराजगी पैदा हो सकती है।

  • हालांकि, प्रदीप सिंह का मानना है कि अमित शाह का गृह मंत्रालय में बने रहना तय है, क्योंकि बिना डिप्टी पीएम बने भी सरकार और संगठन पर उनका पूरा कंट्रोल है।

निष्कर्ष: 2029 की चुनावी बिसात

यदि यह आकलन सच साबित होता है, तो देश को एक नया रक्षा मंत्री मिलना तय है। यह फेरबदल केवल मंत्रियों के विभागों को बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आगामी राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी, 2029 के लोकसभा चुनाव की बिसात और सरकार के भीतर पावर बैलेंस को नए सिरे से तय करने का एक बहुत बड़ा रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक साबित होने वाला है।

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