राजेंद्र पाल गौतम के बयान को दरकिनार कर सीट शेयरिंग और ‘महाप्लान’ पर मुहर
नेशनल डेस्क, 3 जुलाई: उत्तर प्रदेश में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सूबे की सियासत में अभी से ही जबरदस्त उबाल आ गया है। दिल्ली से लेकर लखनऊ के राजनीतिक गलियारों तक समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच ‘इंडी’ (INDIA) गठबंधन के भविष्य को लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। लेकिन अब इन सभी अफवाहों और संशयों पर खुद कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी ने पूरी तरह से पूर्णविराम लगा दिया है।
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राहुल गांधी ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से सीधी बातचीत कर उन्हें स्पष्ट रूप से यह भरोसा दिया है कि आगामी यूपी विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियों का यह मजबूत गठबंधन न सिर्फ बरकरार रहेगा, बल्कि और अधिक आक्रामक रूप से जमीन पर उतरेगा। इस बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने कांग्रेस के ही एक नेता के हालिया विवादित बयान से पैदा हुई कड़वाहट को दूर करने की भी पुरजोर कोशिश की है।
राजेंद्र पाल गौतम के बयान से बढ़ा था तनाव, राहुल गांधी ने कहा—’बयान को करें इग्नोर’
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम के एक विवादित बयान के बाद सपा और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच जमीनी स्तर पर असमंजस और तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। इस बयान को लपकते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) भी विपक्षी एकजुटता पर लगातार तीखे सवाल उठा रही थी और इसे ‘अवसरवादी गठबंधन’ करार दे रही थी।
इसी बढ़ते सियासी तनाव और संभावित नुकसान को भांपते हुए राहुल गांधी ने खुद कमान संभाली और सीधे अखिलेश यादव से संपर्क साधा। राहुल गांधी ने अखिलेश से साफ लफ्जों में कहा:
“वे राजेंद्र पाल गौतम के उस बयान को पूरी तरह से ‘इग्नोर’ यानी नजरअंदाज कर दें। वह बयान उस नेता की व्यक्तिगत राय हो सकती है, लेकिन गठबंधन की आधिकारिक नीति, दिशा और सोच केवल शीर्ष नेतृत्व के फैसलों से ही तय होती है।”
इस स्पष्टीकरण के बाद सपा खेमे में व्याप्त नाराजगी पूरी तरह से शांत होती दिख रही है।
यूपी 2027 फतह करने के लिए सपा-कांग्रेस का महाप्लान
इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बाद दोनों ही दलों के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि अब सीट शेयरिंग (सीटों के बंटवारे) और चुनावी रणनीति को लेकर आपसी तालमेल पहले से कहीं ज्यादा परिपक्व और मजबूत होगा।
लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के अंदर मिले शानदार और अप्रत्याशित नतीजों से उत्साहित दोनों दल अब साल 2027 में सूबे की सत्ता से बीजेपी को बेदखल करने के लिए एक ‘साझा मिनिमम प्रोग्राम’ (Common Minimum Programme) पर काम कर रहे हैं।
गठबंधन की रणनीति के मुख्य बिंदु:
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वोट बैंक का एकीकरण: राहुल गांधी और अखिलेश यादव का मानना है कि यदि पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) और कांग्रेस के पारंपरिक मतदाताओं के बीच किसी भी तरह का बिखराव नहीं हुआ, तो साल 2027 में उत्तर प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।
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संयुक्त रैलियां: खबर है कि दोनों बड़े नेता बहुत जल्द लखनऊ में एक भव्य साझा मंच पर एक साथ नजर आ सकते हैं, जिससे कार्यकर्ताओं को एकजुटता का बड़ा संदेश दिया जा सके।
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जमीनी स्तर पर समन्वय: किसी भी स्थानीय अंतर्विरोध को रोकने के लिए जिला स्तर पर ‘समन्वय समितियां’ (Coordination Committees) बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
क्षेत्रीय समीकरण और कार्यकर्ताओं में नया जोश
राहुल गांधी के इस सकारात्मक और सीधे संदेश के बाद उत्तर प्रदेश के सभी प्रमुख क्षेत्रों—पूर्वांचल, पश्चिमी यूपी, बुंदेलखंड और अवध—में स्थानीय सपा-कांग्रेस कार्यकर्ताओं में एक नया और जबरदस्त जोश देखने को मिल रहा है। जो कार्यकर्ता कल तक सीट शेयरिंग और बयानों को लेकर आमने-सामने थे, वे अब मिलकर हुंकार भरने की तैयारी में हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि
राहुल गांधी का अखिलेश यादव को यह
सीधा और समय पर दिया गया भरोसा,
गठबंधन के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान
को शांत करने और आगामी चुनावों में बीजेपी
के चक्रव्यूह को तोड़ने के लिहाज से बेहद
निर्णायक साबित होने वाला है।







