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दानवीर भारत: हर साल ₹54,000 करोड़ का दान, धार्मिक संस्थाएं और जरूरतमंद पहली पसंद

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नई दिल्ली: भारतीयों की उदारता अब आंकड़ों में भी साफ झलक रही है। अशोका विश्वविद्यालय के ‘सेंटर फॉर सोशल इम्पैक्ट एंड फिलैंथ्रोपी’ (CSIP) द्वारा जारी तीसरी वार्षिक रिपोर्ट ‘भारत दान कैसे देता है 2025-26’ के अनुसार, भारत में घरेलू दान का कुल वार्षिक आंकड़ा 54,000 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है।

कहाँ जाता है भारतीयों का दान?

रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि भारतीयों के दान का सबसे बड़ा हिस्सा संस्थागत सामाजिक कार्यों के बजाय व्यक्तिगत और धार्मिक विश्वासों से प्रेरित है:

  • धार्मिक संगठन: कुल दान का 45.9% हिस्सा।

  • सीधे लोगों को (भिखारी आदि): कुल दान का 41.8% हिस्सा।

  • गैर-धार्मिक संगठन (NGOs): मात्र 14.9% हिस्सा।

कैश से ज्यादा सामान देने का चलन

अध्ययन में पाया गया कि भारतीय नकद राशि के बजाय वस्तु (जैसे भोजन या कपड़े) दान करना अधिक पसंद करते हैं। 46% लोग वस्तु के रूप में दान देते हैं, जबकि 44% लोग नकद दान करते हैं। इसके अलावा, 30% भारतीयों ने समाज सेवा के लिए अपना समय (स्वयंसेवा) देने की बात भी कही है।

गरीब हो या अमीर, दान में सब आगे

यह रिपोर्ट भारतीयों की उस छवि को पुष्ट करती है कि उदारता का संबंध केवल बड़ी आय से नहीं है। कम आय वाले परिवारों (₹4,000-5,000 मासिक खर्च) में भी लगभग 50% परिवार नियमित दान करते हैं। जैसे-जैसे आय बढ़ती है, यह भागीदारी बढ़कर 70-80% तक पहुँच जाती है।

सोशल मीडिया बनाम व्यक्तिगत संपर्क

डिजिटल दौर के बावजूद, दान देने के लिए लोग आज भी व्यक्तिगत भरोसे को प्राथमिकता देते हैं। 25% लोग आमने-सामने के संपर्क से प्रभावित होकर दान देते हैं, जबकि 15% लोग सोशल मीडिया के माध्यम से दान के लिए प्रेरित होते हैं।

: CSIP की निदेशक जिन्नी उप्पल के अनुसार, यह रिपोर्ट भारत में दान की उस गहरी जड़ को दिखाती है जो हमेशा से मौजूद थी लेकिन कभी मापी नहीं गई। रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि यदि इस बिखरे हुए दान को संगठित सामाजिक क्षेत्रों से जोड़ा जाए, तो देश में बड़े सकारात्मक बदलाव लाए जा सकते हैं।

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