पुरी ओडिसा / छत्तीसगढ़ : ओडिशा के पावन तीर्थ क्षेत्र जगन्नाथ पुरी में भारतीय मजदूर संघ (BMS) का 21वाँ त्रैवार्षिक अखिल भारतीय अधिवेशन 6 से 8 फरवरी 2026 तक भव्य, अनुशासित एवं गरिमामय वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस तीन दिवसीय समागम में देशभर के औद्योगिक क्षेत्रों, सार्वजनिक उपक्रमों और असंगठित क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी (2026–2029) का नेतृत्व
अधिवेशन के दौरान आगामी तीन वर्षों के लिए नई अखिल भारतीय कार्यकारिणी का गठन किया गया, जिसमें अनुभवी चेहरों को कमान सौंपी गई है:
▪️अखिल भारतीय अध्यक्ष: एस. एम. मलेशम (तेलंगाना) ▪️अखिल भारतीय महामंत्री: सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय (छत्तीसगढ़)▪️संगठन मंत्री: बी. सुरेंद्रन ▪️सह संगठन मंत्री: गणेश मिश्रा ▪️वित्त मंत्री: अनीस मिश्रा (दिल्ली) इसके अलावा सुखविंदर सिंह, नीता चौबे, अशोक शुक्ला सहित 7 उपाध्यक्ष और राधेश्याम जायसवाल, अंजलि पटेल, अरविंद मिश्रा सहित 7 मंत्रियों को भी नई टीम में स्थान मिला है।
छत्तीसगढ़ का राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा कद
इस अधिवेशन में छत्तीसगढ़ प्रदेश को विशेष सम्मान मिला है। प्रदेश के नेताओं को मिली महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ इस प्रकार हैं: ▪️सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय: छत्तीसगढ़ से आने वाले वरिष्ठ नेता को राष्ट्रीय महामंत्री का अत्यंत महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया।▪️राधेश्याम जायसवाल ( दर्री कोरबा) : इन्हें पुनः अखिल भारतीय मंत्री एवं विद्युत प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई।▪️लक्ष्मण चंद्रा: पुनः राष्ट्रीय पर्यावरण मंच के प्रभारी नियुक्त किए गए। ▪️दिनेश कुमार पाण्डेय (भिलाई) एवं गिरजाशंकर आचार्य (बिलासपुर): इन्हें राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया।
छत्तीसगढ़ बिजली कर्मचारी संघ-महासंघ के प्रदेश महामंत्री नवरतन बरेठ ने बताया कि प्रदेश से 88 और कोरबा जिले से 16 प्रतिनिधियों ने इस ऐतिहासिक अधिवेशन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
श्रमिक हितों पर 5 बड़े प्रस्तावों पर मुहर
अधिवेशन के दौरान बदलते औद्योगिक परिदृश्य और श्रमिक समस्याओं पर गहन मंथन के बाद पाँच प्रमुख प्रस्ताव पारित किए गए:
▪️श्रम कानूनों का सार्वभौमिकरण (बिना किसी अपवाद के सभी श्रमिकों पर लागू करना)। ▪️ठेका श्रमिकों के शोषण को रोकने हेतु सख्त कानूनी संशोधन। ▪️आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा, वेतन और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना। ▪️त्रिपक्षीय वार्ता तंत्र (सरकार-प्रबंधन-श्रमिक) को प्रभावी बनाना।▪️सरकारी विभागों में ‘जनरल भर्ती’ पर लगी रोक को हटाना।
विद्युत क्षेत्र के निजीकरण पर कड़ा रुख
विद्युत क्षेत्र के लिए विशेष रूप से संकल्प लिया गया कि ट्रांसमिशन अधोसंरचना पूर्णतः सरकारी स्वामित्व में रहे और निजी एकाधिकार को रोकने के लिए सरकारी वितरण कंपनियों (Discoms) की उपस्थिति अनिवार्य हो।








