मुंबई की SAFEMA कोर्ट का बड़ा फैसला; आरोपी महेंद्र साहू और उसकी पत्नी की चल-अचल संपत्ति फ्रीज
जांजगीर, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में मादक पदार्थों के अवैध कारोबारियों के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी वित्तीय स्ट्राइक की है। नशे के व्यापार से बनाई गई करीब 35 लाख रुपये की चल-अचल संपत्ति को जब्त करने का आदेश मुंबई स्थित साफेमा (SAFEMA) / एनडीपीएस विशेष न्यायालय ने जारी किया है। जिले में एनडीपीएस एक्ट के तहत संपत्ति अटैच करने का यह पहला बड़ा मामला है, जिससे ड्रग तस्करों में हड़कंप मच गया है।
10 साल की सजा काट रहा है मुख्य आरोपी
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, ग्राम जर्वे निवासी महेंद्र साहू को साल 2018 में भारी मात्रा में मादक पदार्थों के साथ गिरफ्तार किया गया था। आरोपी के खिलाफ पहले से ही चार आपराधिक मामले दर्ज थे। विशेष न्यायालय जांजगीर ने उसे 2019 में 10 साल के कठोर कारावास और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। जेल भेजने के साथ ही पुलिस ने उसकी अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की जांच शुरू की थी।
इन संपत्तियों पर चला सरकारी पंजा
मुंबई की विशेष अदालत ने एनडीपीएस अधिनियम 1985 की धारा 68(सी) के तहत आरोपी और उसकी पत्नी के नाम दर्ज निम्नलिखित संपत्तियों को फ्रीज करने का आदेश दिया है:
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जमीनें: जांजगीर, सुकली और हथनेवरा में स्थित कृषि एवं आवासीय भूमि (कुल मूल्य लगभग 28 लाख रुपये)।
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वाहन: महिंद्रा बोलेरो पिकअप (₹5.30 लाख), एक्वा फोर-जी स्कूटी और हीरो स्प्लेंडर बाइक।
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कुल मूल्यांकन: जब्त की गई सभी संपत्तियों की कुल कीमत लगभग 35 लाख रुपये आंकी गई है।
“नशे के सौदागरों को केवल जेल भेजना ही काफी नहीं है, बल्कि उनकी अवैध कमाई को भी जब्त करना जरूरी है। मुंबई कोर्ट के आदेश पर यह कार्रवाई की गई है। अपराधियों के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।” — विजय कुमार पाण्डेय, पुलिस अधीक्षक, जांजगीर-चांपा
अपराध से संपत्ति बनाने वालों को चेतावनी
इस कार्रवाई ने स्पष्ट संदेश दिया है कि मादक पदार्थों की तस्करी से अर्जित की गई कोई भी संपत्ति सुरक्षित नहीं है। पुलिस अब अन्य बड़े तस्करों की संपत्तियों का ब्यौरा भी खंगाल रही है ताकि उनके आर्थिक साम्राज्य को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।








