कोरबा | 07 जनवरी :अगर आप कोरबा जिले में हैं और गलती से बीमार या दुर्घटना के शिकार हो गए हैं, तो एम्बुलेंस का इंतजार करने से बेहतर है कि आप स्वयं ही ‘चमत्कार’ की प्रार्थना शुरू कर दें। जिले में 108 संजीवनी एक्सप्रेस सेवा अब मरीजों को अस्पताल पहुँचाने के बजाय, उनके धैर्य की परीक्षा लेने का नया केंद्र बन गई है।
3 घंटे का ‘इंतजार’, सिस्टम का ‘अत्याचार’ ताजा मामला मंगलवार रात पोड़ी उपरोड़ा सीएचसी का है। जहाँ एक लहूलुहान मरीज शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक इस उम्मीद में तड़पता रहा कि सफेद रंग की गाड़ी आएगी और उसे ‘हायर सेंटर’ कटघोरा ले जाएगी। लेकिन साहिब, 108 का नंबर तो ‘डिजिटल इंडिया’ की किसी ऐसी गली में फंसा था जहाँ से केवल ‘बिजी’ होने की आवाज आ रही थी।
बिजी नंबर या आराम फरमाती एम्बुलेंस? जब कंट्रोल रूम से संपर्क नहीं हुआ, तो स्थानीय जासूसों (सहयोगियों) ने मोर्चा संभाला। रात 8:13 बजे जटगा में संजीवनी महोदया आराम फरमाती पाई गईं। फोन पर ‘केस में बिजी’ बताने वाली एम्बुलेंस धरातल पर शांति से खड़ी अपनी ड्यूटी (या शायद अपनी नींद) पूरी कर रही थी। इसे लापरवाही कहें या कर्तव्य के प्रति ‘अगाध प्रेम’, यह समझ से परे है।
चार पहियों पर टिका पूरा जिला औद्योगिक नगरी और भारी-भरकम राजस्व देने वाले कोरबा जिले की विडंबना देखिए—यहाँ महज चार एम्बुलेंस ही ‘सांसें’ ले रही हैं, बाकी सब कबाड़खाना की शोभा बढ़ा रही हैं। ऐसा लगता है जैसे विभाग चाहता है कि मरीज अपनी बीमारी को थोड़ा और ‘होल्ड’ पर रखे, क्योंकि सिस्टम अभी ‘बिजी’ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह लापरवाही नहीं, बल्कि आम आदमी की जान के साथ खेला जा रहा एक क्रूर मजाक है। अब देखना यह है कि प्रशासन की नींद कब खुलती है या फिर जनता को ऐसे ही ‘बिजी’ टोन के भरोसे छोड़ दिया जाएगा।








