कवर्धा छत्तीसगढ़ 7 जनवरी 2026 :छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले से विज्ञान को चुनौती देने वाला एक अद्भुत मामला सामने आया है। यहाँ के सरकारी संग्रहण केंद्रों में रहने वाले चूहे, दीमक और कीड़े इतने “प्रतिभाशाली” हो गए हैं कि उन्होंने देखते ही देखते 26 हजार क्विंटल धान साफ कर दिया। इस “दावत” की सरकारी कीमत करीब 7 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
आम तौर पर चूहे मुट्ठी भर अनाज खाते हैं, लेकिन कवर्धा के बाजार चारभाठा और बघर्रा संग्रहण केंद्रों के चूहे शायद जिम जाते हैं या फिर उनके पास कोई जादुई शक्ति है। अधिकारियों का तर्क है कि 8 लाख क्विंटल में से जो 26 हजार क्विंटल धान गायब हुआ है, उसे चूहों ने खाया और मौसम ने सोख लिया।
भ्रष्टाचार की ‘फर्जी’ हाजिरी और गायब सीसीटीवी
जांच में पता चला है कि यह सिर्फ चूहों का पेट नहीं, बल्कि सिस्टम का “बड़ा छेद” है। आरोप है कि केंद्र प्रभारी ने कागजों पर फर्जी आवक-जावक दिखाई, मरे हुए चूहे के नाम पर शायद बिल फाड़े और सीसीटीवी कैमरों को समय-समय पर ‘विश्राम’ दिया ताकि उनकी कलाकारी कैद न हो सके।
डीएमओ साहब का ‘पॉजिटिव’ नजरिया
मामले में जिला विपणन अधिकारी (DMO) का तर्क और भी दिलचस्प है। उनका कहना है कि चूहों और दीमकों ने जो नुकसान किया है, उसके बावजूद कवर्धा की स्थिति प्रदेश के अन्य 65 केंद्रों से “बेहतर” है। यानी, साहब का मानना है कि अगर पड़ोसी के घर में ज्यादा चोरी हुई है, तो हमारे यहाँ की 7 करोड़ की डकैती को ‘सफलता’ माना जाना चाहिए!
खास बातें जिन पर यकीन करना मुश्किल है
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बाजार चारभाठा केंद्र: अकेले यहाँ से 22 हजार क्विंटल धान “गायब” (या चूहों का नाश्ता)।
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तकनीकी खेल: सीसीटीवी कैमरों से छेड़छाड़ ताकि असली ‘दो पैरों वाले चूहों’ की पहचान न हो सके।
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कार्रवाई: केंद्र प्रभारी प्रीतेश पांडेय को हटा दिया गया है, लेकिन सवाल वही है— क्या 7 करोड़ का धान वाकई दीमक खा गए या फाइलें दीमक चाट गईं?








