तिरुवनंतपुरम: केरल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीतिक दिशा बदल दी है। शुरुआती रुझानों और अब तक की मतगणना के अनुसार, कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने बहुमत के जादुई आंकड़े (71 सीटें) को पार कर लिया है। एक दशक बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन की लहर साफ दिखाई दे रही है।
रुझानों में UDF की ‘सेंचुरी’
राज्य की 140 सीटों पर आए अब तक के रुझानों के मुताबिक:
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UDF: 97-100 सीटों पर आगे/जीत (स्पष्ट बहुमत)
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LDF: 40 सीटों पर सिमटी
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NDA/अन्य: 02-03 सीटें
“यह जनता का स्पष्ट जनादेश है” – सन्नी जोसेफ़
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सन्नी जोसेफ़ ने इस ऐतिहासिक जीत पर राज्य की जनता का आभार व्यक्त किया है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा:
“केरल की जनता ने UDF पर जो भरोसा जताया है, मैं उसके लिए उनका ऋणी हूँ। यह जीत दिखाती है कि जनता LDF की जन-विरोधी नीतियों और भ्रष्टाचार से त्रस्त थी। यह वही जनादेश है जिसकी झलक हमें स्थानीय निकाय चुनावों में भी देखने को मिली थी।”
बड़े चेहरों का हाल
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पिनाराई विजयन: मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन धर्मदाम सीट पर कड़े मुकाबले में फंसे हुए हैं, जहाँ कांग्रेस के वी.पी. अब्दुल रशीद उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
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मंत्रीमंडल को झटका: एलडीएफ सरकार के करीब एक दर्जन मंत्री अपनी सीटों पर पीछे चल रहे हैं, जो सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) का बड़ा संकेत है।
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V.D. सतीसन: विपक्ष के नेता वी.डी. सतीसन अपनी सीट पर मजबूत बढ़त बनाए हुए हैं।
सत्ता परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त
केरल में हर पांच साल में सत्ता बदलने की परंपरा को 2021 में वामपंथियों ने तोड़ा था, लेकिन 2026 के इन नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि केरल की राजनीति में एकाधिकार संभव नहीं है। UDF के खेमे में जश्न का माहौल है और जल्द ही मुख्यमंत्री पद के नाम पर मंथन शुरू होने की उम्मीद है।







