कोलकाता 4 मई 2026: पश्चिम बंगाल के चुनावी इतिहास में आज का दिन बेहद निर्णायक है। मतगणना शुरू हो चुकी है और शुरुआती रुझानों के साथ ही उन 10 हाई-प्रोफाइल सीटों पर सस्पेंस गहरा जायेगा , जहाँ के नतीजे न केवल दिग्गजों का भविष्य तय करेंगे, बल्कि बंगाल की सत्ता की चाबी किसके पास होगी, इसका भी इशारा कर देंगे।आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।
1. भवानीपुर: ममता बनाम सुवेंदु – ‘बदले’ का महासंग्राम
नंदीग्राम की हार के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी पारंपरिक सीट भवानीपुर पर लौटी हैं, लेकिन भाजपा ने यहाँ फिर से उनके कट्टर प्रतिद्वंद्वी सुवेंदु अधिकारी को उतारकर मुकाबले को ‘व्यक्तिगत’ बना दिया है। क्या ममता अपनी साख बचा पाएंगी या सुवेंदु एक बार फिर उलटफेर करेंगे?
2. नंदीग्राम: आंदोलन की जमीन पर वर्चस्व की लड़ाई
सुवेंदु अधिकारी और टीएमसी के पवित्र कार के बीच यहाँ कांटे की टक्कर है। यह सीट तय करेगी कि तटीय बंगाल में भाजपा का 2021 वाला जादू बरकरार है या टीएमसी ने अपनी खोई हुई जमीन वापस पा ली है।
3. डायमंड हार्बर: टीएमसी के दुर्ग में ‘री-पोल’ का असर
टीएमसी के इस मजबूत किले में 2 मई को हुए दोबारा मतदान (Repoll) ने सबको चौंका दिया था। गौतम भट्टाचार्य (TMC) और दीपक कुमार हलदर (BJP) के बीच का यह मुकाबला संगठन की मजबूती का लिटमस टेस्ट है।
4. पानीहाटी: आरजी कर कांड की ‘आंच’ और न्याय की मांग
आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड की पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ (BJP) यहाँ से चुनाव लड़ रही हैं। महिला सुरक्षा और न्याय के मुद्दे पर लड़ रही रत्ना के सामने टीएमसी के तीर्थंकर घोष की कड़ी चुनौती है।
5. खड़गपुर सदर: दिलीप घोष की साख दांव पर
भाजपा के कद्दावर नेता दिलीप घोष अपनी इस पारंपरिक सीट पर टीएमसी के प्रदीप सरकार से मुकाबला कर रहे हैं। यहाँ का नतीजा भाजपा के संगठनात्मक आधार की कहानी कहेगा।
6. हिंगलगंज: संदेशखाली की ‘आवाज’ रेखा पात्रा
संदेशखाली आंदोलनों का चेहरा रहीं रेखा पात्रा (BJP) पर पार्टी ने फिर दांव खेला है। उनके सामने टीएमसी के आनंद सरकार हैं। क्या संदेशखाली का गुस्सा वोटों में बदलेगा?
7. डोमकल: पूर्व IPS हुमायूं कबीर की परीक्षा
टीएमसी के टिकट पर लड़ रहे पूर्व आईपीएस हुमायूं कबीर का मुकाबला माकपा के मुस्तफिजुर रहमान से है। मुर्शिदाबाद की इस सीट पर पुलिसिंग बनाम राजनीति का कड़ा इम्तिहान है।
8. बहरामपुर: अधीर रंजन चौधरी की राजनीतिक वापसी?
कांग्रेस के ‘रॉबिनहुड’ कहे जाने वाले अधीर रंजन चौधरी के लिए यह अस्तित्व की लड़ाई है। भाजपा के सुब्रत मैत्रा उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
9. समसेरगंज: धार्मिक ध्रुवीकरण और वक्फ का मुद्दा
वक्फ संशोधन विवाद के बाद यहाँ का चुनाव बेहद संवेदनशील रहा है। नूर आलम (TMC), सस्ति चरण घोष (BJP) और मो नजमे आलम (Congress) के बीच त्रिकोणीय मुकाबले में ध्रुवीकरण की भूमिका अहम होगी।
10. कोलकाता पोर्ट: मंत्री फिरहाद हकीम की घेराबंदी
टीएमसी के कद्दावर नेता और मंत्री फिरहाद हकीम के सामने भाजपा के राकेश सिंह ने शहरी बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं को मुद्दा बनाया है। क्या हकीम अपना गढ़ बचा पाएंगे?
निष्कर्ष:
इन 10 सीटों के नतीजे बंगाल की राजनीति की नई दिशा तय करेंगे। दोपहर तक यह साफ हो जाएगा कि बंगाल में ‘दीदी’ का किला बरकरार है या ‘परिवर्तन’ की नई लहर चल पड़ी है।







