Mayor’s Ultimatum to the ‘System’: “Send my message to the CM, it’s impossible to work in such conditions”
इंदौर, मध्यप्रदेश | शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से बिगड़े हालात ने अब प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारे में भूचाल ला दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुवार को रेसीडेंसी कोठी में हुई बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव का धैर्य जवाब दे गया।

अधिकारियों की कार्यप्रणाली और कलेक्टर की कथित ‘सुस्ती’ पर भड़कते हुए महापौर ने दो-टूक कह दिया कि अगर अधिकारी नहीं सुनेंगे, तो वे इस व्यवस्था में काम नहीं कर पाएंगे।
“मैं राजनीति में इसके लिए नहीं आया था”
बैठक के दौरान महापौर का गुस्सा अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे के सामने जमकर फूटा। महापौर ने तल्ख लहजे में कहा:
“अधिकारी संवाद तक नहीं करते। फाइलें स्वीकारना बंद कर दी गई हैं। अगर सिस्टम यही है, तो मेरा यह संदेश मुख्यमंत्री तक पहुंचा दीजिए कि मैं इन परिस्थितियों में काम नहीं कर सकता। मैं राजनीति में सेवा के लिए आया था, इस तरह की अनदेखी झेलने के लिए नहीं।”
कलेक्टर और निगमायुक्त पर भी बरसे महापौर
महापौर ने कलेक्टर शिवम वर्मा की कार्यशैली पर सीधा सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने दो दिन पहले ही घटना की सूचना मैसेज से दे दी थी, लेकिन प्रशासन तब जागा जब वे खुद अस्पताल पहुंचे।
वहीं, नगर निगम के भीतर अधिकारियों के बीच कार्य विभाजन को लेकर भी महापौर ने निगमायुक्त को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि:
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एक अपर आयुक्त के पास 5-5 विभागों का बोझ है।
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जबकि कुछ अपर आयुक्त पूरी तरह ‘फ्री’ बैठे हैं।
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अधिकारी फोन तक नहीं उठाते, जिससे जनता के काम अटके हुए हैं।
विधायक महेंद्र हार्डिया ने भी खोला मोर्चा
बैठक में मौजूद विधायक महेंद्र हार्डिया ने महापौर की बात का समर्थन करते हुए कहा कि दूषित पानी सिर्फ भागीरथपुरा की नहीं, बल्कि पूरे शहर की समस्या बन चुकी है। मूसाखेड़ी, कैलाश पार्क और रामकृष्ण जैसी दर्जनों बस्तियों में लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि निगम में हजारों शिकायतें लंबित हैं और अधिकारी एक ही समय में कई अलग-अलग पदों (जोनल ऑफिसर और बीओ) का प्रभार संभाले बैठे हैं, जिससे काम की गुणवत्ता खत्म हो गई है।
ACS की सफाई: पानी में प्रदूषण की हुई पुष्टि
मामले की गंभीरता को देखते हुए ACS संजय दुबे ने माना कि जांच रिपोर्ट में नर्मदा जल में दूषित पानी मिलने की पुष्टि हुई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि:
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अमृत-2 प्रोजेक्ट के तहत पाइपलाइन के कार्यों में तेजी लाई जाएगी।
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पेंडिंग कार्यों के लिए तत्काल फंड उपलब्ध कराया जाएगा।
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व्यवस्था सुधारने के लिए इंदौर को नए अधिकारी भी दिए जा सकते हैं।
महापौर की अंतिम चेतावनी
महापौर ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा, “अगर एक काम के लिए 100 बार फोन करना पड़ेगा तो मैं करूंगा, लेकिन 101वीं बार फोन सीधे ACS को जाएगा।” अब देखना यह है कि महापौर के इस ‘विद्रोह’ के बाद इंदौर के प्रशासनिक अमले की कार्यशैली में कितना सुधार आता है।








