Korba Chhattisgarh: कोरबा रजगामार में एक चौंकाने वाले मामले में भाई-बहन ने मिलकर अपने जीजा की हत्या कर दी और इसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की। न्यायालय तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश, पीठासीन न्यायाधीश सुनील कुमार नंदे सभी साक्ष्य तथ्यों का विचारण कर आरोपियों को दोषी पाया, न्यायालय ने दोनों को हत्या और साक्ष्य छिपाने का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
घटना का विवरण
मृतक मधुसूदन हंसराज अपनी पत्नी और बच्चों के साथ अपने ससुराल में रहता था। उसकी पत्नी सरस्वती और साला राजकुमार चौहान के साथ उसका अक्सर विवाद होता था। 17 जून 2024 की रात को भी दोनों के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद मधुसूदन की हत्या कर दी गई। साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से उसकी हत्या को आत्महत्या के रूप में परिणित करने आंगन के बाथरूम के म्यार में नायलॉन रस्सी के फंदे से उसे लटका दिया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी सिर में चोट से मौत की पुष्टि हुई।
हत्या का खुलासा
रजगामार पुलिस ने जांच के दौरान पाया कि मधुसूदन की हत्या उसकी पत्नी सरस्वती और साला राजकुमार चौहान ने मिलकर की थी। उन्होंने मधुसूदन के सिर और बाल को पकड़कर दीवार में ठोकर मारकर उसकी हत्या कर दी और साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से उसकी हत्या को आत्महत्या के रूप में परिणित करने के लिए आंगन के बाथरूम के म्यार में नायलॉन रस्सी के फंदे से उसे लटका दिया।
न्यायालय का फैसला
न्यायालय ने दोनों आरोपियों को हत्या और साक्ष्य छिपाने का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त लोक अभियोजक कृष्ण कुमार द्विवेदी ने मामले में मजबूत पैरवी की और न्यायालय ने उनके तर्कों को ध्यान में रखते हुए सजा सुनाई।
सजा का विवरण
– *आजन्म कारावास*: धारा 302, 34 में आजीवन कारावास और 100-100 रुपये का अर्थदंड।
– *तीन वर्ष का कारावास*: धारा 201, 34 में 3-3 वर्ष का कारावास और 100-100 रुपये का अर्थदंड।
– *अर्थदंड जमा न करने पर*: दोनों सजा में एक-एक माह के अतिरिक्त कारावास की सजा पृथक से भुगताई जाएगी। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी ।
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