Latest News
छत्तीसगढ़ कैबिनेट: 4,000 करोड़ के बजट के साथ ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मंजूर, ‘अटल आजीविका हाट’ से बढ़ेंगे स्वरोजगार के अवसर जेल के भीतर खूनी संघर्ष: मानसिक रूप से अस्वस्थ बंदियों के बैरक में नाली के स्लैब से सिर कुचलकर बंदी की हत्या ⚡ छत्तीसगढ़ में बड़ा बिजली संकट: प्रबंधन से वार्ता विफल, विद्युत संविदा कर्मचारियों का ‘अनिश्चितकालीन कामबंद’ आंदोलन शुरू ## कोरबा-सक्ती मुख्य मार्ग पर भीषण सड़क हादसा: ट्रैक्टर की टक्कर से एक्टिवा सवार युवक की मौके पर ही मौत, चालक फरार छत्तीसगढ़ का ‘सायको किलर’: बलौदाबाजार के खर्वे गांव में 8 ग्रामीणों की हत्या का रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा कोरबा: कुआं भट्ठा बस्ती को उजाड़ने की साजिश! फर्जी कागजातों के खेल का आरोप,भड़के लोग
Home » रायपुर » बिलासपुर » हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: डॉ. प्रवेश शुक्ला के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: डॉ. प्रवेश शुक्ला के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द

Share:

 

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में रायपुर शराब घोटाले के आरोपी अनवर ढेबर के इलाज से संबंधित मामले में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी सर्जन डॉ. प्रवेश शुक्ला के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि राज्य सरकार के अधिकारियों ने डॉ. शुक्ला के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण तरीके से अभियोजन चलाया।

क्या था मामला?
डॉ. प्रवेश शुक्ला डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में संविदा पर सर्जन के रूप में नियुक्त थे। उन्होंने अनवर ढेबर को कोलोनोस्कोपी के लिए एम्स, रायपुर या अन्य सरकारी अस्पताल में रेफर किया था, क्योंकि डीकेएस अस्पताल में वयस्क कोलोनोस्कोपी सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इसके बावजूद, डॉ. शुक्ला को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और बाद में उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं।

कोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई की और पाया कि डॉ. शुक्ला के खिलाफ लगाए गए आरोप बेतुके हैं और कोई अपराध सिद्ध नहीं करते। कोर्ट ने कहा कि यह मामला दुर्भावनापूर्ण अभियोजन का उदाहरण है और एसीबी, ईओडब्ल्यू और पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया गया।

डॉ. शुक्ला की योग्यता
डॉ. शुक्ला एक सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर हैं, जिनके पास एमबीबीएस, एमएस (सर्जरी), और डॉ. एनबी (सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी) की डिग्री है। कोर्ट ने माना कि डॉ. शुक्ला को प्रताड़ित किया गया और उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए।

पहले का फैसला
3 जनवरी 2025 को हाईकोर्ट के एकल पीठ ने डॉ. शुक्ला की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया था, लेकिन राज्य सरकार ने उन्हें ड्यूटी जॉइन करने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद, दोबारा याचिका दायर की गई, जिसके परिणामस्वरूप डिवीजन बेंच ने एफआईआर रद्द करने का फैसला सुनाया ।

Leave a Comment

latest news