अयोध्या 29 जून । श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावा चोरी का मामला अब गहराता जा रहा है। चोरी के तार ट्रस्ट के भीतर तक जुड़ने की आशंका के बीच पुलिस और एसआईटी (SIT) की जांच का दायरा बढ़ गया है। ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देते ही चंपत राय से पुलिस ने गहन पूछताछ की है और उनका बयान दर्ज किया है।
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हालांकि, पुलिस की शुरुआती एफआईआर (FIR) में चंपत राय या ट्रस्ट के किसी अन्य पदाधिकारी का नाम शामिल नहीं है, लेकिन चोरी के आरोपियों की गतिविधियों और मंदिर के भीतर की सुरक्षा व्यवस्था को समझने के लिए यह पूछताछ की गई है। बता दें कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर ही पुलिस ने कार्रवाई आगे बढ़ाई थी, और सबसे पहले चंपत राय से ही जानकारी जुटाई गई थी।
अनिल मिश्रा और गोपाल राव से भी होगी पूछताछ
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच के अगले चरण में ट्रस्ट से जुड़े अन्य रसूखदार पदाधिकारियों पर शिकंजा कसेगा। इनमें डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। मामले की कड़ियों को जोड़ने के लिए पुलिस क्रमवार तरीके से सभी संबंधित लोगों के बयान दर्ज कर रही है। उल्लेखनीय है कि चंपत राय और अनिल मिश्रा ने शनिवार को ही अचानक अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।
आरोपियों के घर छापेमारी: कैश, ज्वैलरी और जमीन के कागज बरामद
ट्रस्ट की शिकायत पर पुलिस ने शुक्रवार को आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया था। रविवार को पुलिस ने इन आरोपियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान भारी मात्रा में कैश, सोने-चांदी के गहने और जमीनों के दस्तावेज बरामद हुए हैं। पुलिस आज सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है, ताकि चोरी के इस बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जा सके।
चंपत राय के इस्तीफे के तरीके पर संतों ने उठाए गंभीर सवाल
चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के अचानक पद छोड़ने को लेकर अयोध्या के संत समाज में भारी नाराजगी और संदेह का माहौल है। संतों का कहना है कि इस्तीफे की यह प्रक्रिया सामान्य नहीं है।
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सोशल मीडिया पर चुप्पी: संतों के मुताबिक, चंपत राय सोशल मीडिया (X और फेसबुक) पर काफी सक्रिय रहते हैं। ऐसे में इतने बड़े फैसले की जानकारी उन्होंने रामभक्तों को खुद क्यों नहीं दी?
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अध्यक्ष के बजाय कोषाध्यक्ष को इस्तीफा क्यों?: प्रशासनिक नियमों के अनुसार, महासचिव को अपना इस्तीफा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास को सौंपना चाहिए था। लेकिन चर्चा है कि यह इस्तीफा कोषाध्यक्ष को दिया गया, जिसने संतों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल, अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के भीतर चल रही इस उथल-पुथल को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। माना जा रहा है कि आगामी 11 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में ही इस पूरे घटनाक्रम की असली स्थिति साफ हो पाएगी।
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