रायपुर, 28 जून।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित प्रमुख औद्योगिक विस्फोटक निर्माता कंपनी एसबीएल एनर्जी लिमिटेड (SBL Energy Limited – पुराना नाम: अमीन एक्सप्लोसिव प्राइवेट लिमिटेड) पर अमेरिकी सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा आर्थिक प्रतिबंध लगा दिया है। अमेरिकी वित्त विभाग (US Treasury) ने इस कार्रवाई के तहत कंपनी और उसके सीईओ (CEO) आलोक चौधरी सहित कुल आठ व्यक्तियों और संस्थाओं को प्रतिबंधित सूची में डाल दिया है।
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🚨 अमेरिका ने क्यों की यह कार्रवाई? (प्रमुख आरोप)
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का दावा है कि एसबीएल एनर्जी ने साल 2024 से सूडान की ‘टार्गेट मल्टी एक्टिविटीज कंपनी’ (TMAC) को 200 से अधिक खेपों (Consignments) में विस्फोटक और उससे जुड़ी सामग्री की सप्लाई की। अमेरिका का आरोप है कि यह सामग्री अंततः उस नेटवर्क तक पहुंची, जो सूडान में चल रहे हिंसक गृहयुद्ध को बढ़ावा दे रहा है।
🚫 प्रतिबंधों का क्या होगा असर?
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संपत्तियां फ्रीज: एसबीएल एनर्जी और सीईओ आलोक चौधरी की अमेरिका में मौजूद सभी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया है।
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लेन-देन पर रोक: कोई भी अमेरिकी नागरिक, वित्तीय संस्थान या कंपनी अब इनके साथ किसी भी तरह का व्यापारिक या आर्थिक लेन-देन नहीं कर सकेगी।
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घरेलू असर: हालांकि, भारत के भीतर कंपनी के मौजूदा कामकाज और बिजनेस पर इस प्रतिबंध का क्या और कितना असर पड़ेगा, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
💬 कंपनी ने आरोपों को नकारा, कहा- “दावे पूरी तरह गलत”
अमेरिकी कार्रवाई के बाद एसबीएल एनर्जी के सीईओ आलोक चौधरी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी का पक्ष इस प्रकार है:
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सैन्य उपयोग से इनकार: कंपनी किसी भी तरह के रक्षा उत्पाद या मिलिट्री ग्रेड विस्फोटकों का निर्माण नहीं करती है।
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वैध नागरिक उपयोग: कंपनी केवल भारत सरकार से लाइसेंस प्राप्त औद्योगिक विस्फोटकों का उत्पादन करती है, जिनका इस्तेमाल पूरी तरह खनन (Mining) और सिविल कंस्ट्रक्शन के कामों में होता है।
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आंकड़ों पर आपत्ति: अमेरिका का 200 खेप भेजने का दावा पूरी तरह गलत है। साल 2022 से अब तक सूडान को केवल 10 खेप ही भेजी गई हैं।
आगामी कदम: कंपनी प्रबंधन ने कहा है कि वे जल्द ही अपने सभी वैध दस्तावेज और रिकॉर्ड्स अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष पेश करेंगे और इन प्रतिबंधों को हटाने की आधिकारिक मांग करेंगे।








