नई दिल्ली 23 जून : भारत ने कृषि निर्यात के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल कर लिया है। देवभूमि उत्तराखंड की प्रीमियम क्वालिटी की ताजी लीची की पहली खेप सफलतापूर्वक इटली (यूरोप) भेज दी गई है। यह पहला मौका है जब उत्तराखंड में उगाई गई ताजी लीची ने यूरोपीय बाजार में कदम रखा है।

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इस ऐतिहासिक शुरुआत की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
मुख्य बिंदु: निर्यात से जुड़े अहम आंकड़े

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के सहयोग से देहरादून से इस पहली खेप को रवाना किया गया।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| उत्पाद | प्रीमियम उत्तराखंड लीची (ताजी) |
| कुल मात्रा | 1 मीट्रिक टन (1,000 किलोग्राम) |
| निर्यात गंतव्य | इटली (यूरोप) |
| सहयोगी संस्था | APEDA (एपीडा) |
किसानों को मिलेगा बंपर फायदा
इस कामयाबी से उत्तराखंड (विशेषकर देहरादून और आसपास के क्षेत्रों) के लीची उत्पादक किसानों को सीधा फायदा होने वाला है:
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बेहतर दाम: अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलने से किसानों को अपनी फसल की सही और ऊंची कीमत मिल सकेगी।
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घरेलू निर्भरता होगी कम: अब किसान सिर्फ लोकल मार्केट के भरोसे नहीं रहेंगे।
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क्वालिटी पर फोकस: इस सफलता से अन्य किसान भी एक्सपोर्ट क्वालिटी की खेती करने के लिए प्रेरित होंगे।

यूरोपीय मानकों पर खरी उतरी भारतीय लीची
यूरोपीय देशों में खाद्य सुरक्षा, पैकेजिंग और क्वालिटी को लेकर दुनिया के सबसे कड़े नियम (Strict Standards) होते हैं। इटली में इस खेप का सफलतापूर्वक पहुंचना यह साबित करता है कि उत्तराखंड की लीची वैश्विक स्तर के मानकों पर खरी उतरी है। इससे दुनिया भर में भारतीय बागवानी उत्पादों की साख और मजबूत होगी।

APEDA का विजन: एपीडा लगातार भारतीय किसानों को वैश्विक खरीदारों से जोड़ने में जुटा है। उत्तराखंड की लीची का यह सफर तो बस एक शुरुआत है, आने वाले समय में हिमालयी क्षेत्र के अन्य प्रीमियम फलों को भी दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने की योजना है।
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