मुख्य बातें:
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मामला: बिहार के भोजपुर जिले में सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर का मामला।
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अदालत का रुख: सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत सुनवाई की याचिका खारिज की, पहले रजिस्ट्री से संपर्क करने को कहा।
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याचिकाकर्ता की मांग: मामले की निष्पक्ष CBI जांच हो और दोषी पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज की जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत सुनवाई से किया इनकार, कहा– “तय प्रक्रिया अपनाएं”
बिहार न्यूज 23 जून : बिहार के भोजपुर जिले में हुए बहुचर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की गूंज अब देश की सबसे बड़ी अदालत में सुनाई दे रही है। इस कथित एनकाउंटर की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने इस मामले पर तुरंत (अर्जेंट) सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता व अधिवक्ता विशाल तिवारी को निर्देश दिया है कि वे जल्द सुनवाई के लिए सीधे कोर्ट रूम में अपील करने के बजाय पहले तय प्रक्रिया का पालन करें और सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से संपर्क करें। अब रजिस्ट्री की अनुमति मिलने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि अदालत इस संवेदनशील मामले पर कब सुनवाई करेगी।
याचिका में बड़ी मांगें: CBI जांच, FIR और रिटायर्ड जज की कमेटी
दायर की गई जनहित याचिका में भरत भूषण तिवारी की मौत को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं और निम्नलिखित मांगें की गई हैं:
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निष्पक्ष CBI जांच: पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए जांच को तुरंत CBI के हवाले किया जाए।
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पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई: इस एनकाउंटर में शामिल रहे सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से FIR दर्ज की जाए।
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स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति: देश में कानून के शासन (Rule of Law) की रक्षा के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का गठन हो, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के ही किसी सेवानिवृत्त (Retired) जज को सौंपी जाए।
“यह सोची-समझी हत्या है” – याचिकाकर्ता का गंभीर आरोप
याचिकाकर्ता ने इस एनकाउंटर की विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। याचिका में सीधे तौर पर आरोप लगाया गया है कि भरत भूषण तिवारी की मौत कोई सामान्य एनकाउंटर नहीं, बल्कि एक ‘फर्जी एनकाउंटर’ और सोची-समझी हत्या है। याचिका के अनुसार, स्थानीय प्रशासन के प्रभाव से मुक्त होकर सच सामने लाने के लिए एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है।
कौन थे भरत भूषण तिवारी और क्यों गर्माया है माहौल?
मात्र 28 वर्ष की उम्र में एनकाउंटर का शिकार हुए भरत भूषण तिवारी भोजपुर के बिलौती गांव के रहने वाले थे। वे इलाके में एक उभरते हुए और बेहद लोकप्रिय सामाजिक कार्यकर्ता थे।
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जनता की आवाज: भरत सोन नदी के किनारे बसे बाढ़ प्रभावित गांवों के पुनर्वास, सड़क, बिजली और पेयजल जैसे बुनियादी मुद्दों को लगातार उठाते रहते थे।
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सोशल मीडिया पर बेबाकी: फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भरत काफी सक्रिय थे। वे वीडियो और पोस्ट के जरिए बिहार सरकार, स्थानीय प्रशासन, बदहाल व्यवस्था और राजनेताओं की तीखी और खुली आलोचना करने के लिए जाने जाते थे।
प्रशासन के खिलाफ मुखर रहने वाले एक युवा कार्यकर्ता की इस तरह एनकाउंटर में मौत होने से उनके समर्थकों में भारी आक्रोश है। स्थानीय जनता और समर्थक इसे दबाने की कोशिश मान रहे हैं और लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं।
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