रायपुर/महासमुंद 23 जून । छत्तीसगढ़ के खनिज इतिहास में 22 जून 2026 की तारीख एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। महासमुंद जिले के सरायपाली क्षेत्र स्थित बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में वैज्ञानिकों को एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली है। वैज्ञानिक अन्वेषण (Scientific Exploration) के दौरान यहाँ से निकाले गए 200 टन खनिज मलबे की प्रोसेसिंग से 5 असली हीरे प्राप्त हुए हैं।
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खनिज विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती दौर में ही ‘जेम क्वालिटी’ हीरों का मिलना इस बात का पुख्ता सबूत है कि छत्तीसगढ़ के नीचे हीरों का एक विशाल खजाना छिपा हुआ है।
कैसे मिली यह बड़ी कामयाबी?
यह ऐतिहासिक सफलता NMDC और CMDC की संयुक्त कंपनी (NMDC-CMDC लिमिटेड) को मिली है। कंपनी ने अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर इस खजाने को खोजा है:
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स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग और आधुनिक जियोफिजिकल सर्वे किया गया।
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जमीन के भीतर 500 मीटर गहरी एक्सप्लोरेटरी ड्रिलिंग की गई।
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इसके बाद निकले 200 टन मलबे को मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध पन्ना डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट भेजा गया, जहाँ टेस्टिंग के दौरान इन 5 हीरों की पुष्टि हुई।
मिले हुए हीरों का पूरा ‘एक्स-रे’ (कुल वजन: 1.22 कैरेट)
प्राप्त हुए पांचों हीरों की खासियतें इस प्रकार हैं:
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सफेद हीरे (जेम क्वालिटी): 2 हीरे (वजन: 0.19 और 0.06 कैरेट) – ये बेहद चमकदार और आभूषण बनाने के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं।
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पीला हीरा: 1 हीरा (वजन: 0.32 कैरेट)
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भूरे हीरे: 2 हीरे (वजन: 0.59 और 0.06 कैरेट)
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: छत्तीसगढ़ में फिलहाल हीरों को रखने की पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था न होने के कारण, इन सभी 5 हीरों को मध्य प्रदेश के पन्ना स्थित एनएमडीसी के हाई-सिक्योरिटी स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित जमा कर दिया गया है।
क्या होते हैं ‘जेम क्वालिटी’ हीरे और क्यों ये हैं खास?
हीरे मुख्य रूप से दो श्रेणियों के होते हैं। महासमुंद में मिले सफेद हीरे ‘जेम क्वालिटी’ के हैं, जो अपनी अद्वितीय चमक, पारदर्शिता और शुद्धता के लिए जाने जाते हैं। इनका उपयोग महंगे आभूषण (Jewelry) बनाने में होता है। इसके विपरीत, नॉन-जेम क्वालिटी के हीरों का इस्तेमाल केवल औद्योगिक कटर और मशीनों में किया जाता है।
‘आत्मनिर्भर भारत’ और छत्तीसगढ़ की तरक्की को लगेंगे पंख
भारत दुनिया का सबसे बड़ा डायमंड कटिंग और पॉलिशिंग हब है, लेकिन हमें कच्चे हीरों (Rough Diamonds) के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता है। छत्तीसगढ़ की यह खोज भारत को हीरा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में गेम-चेंजर साबित होगी।
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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जताई खुशी:
“महासमुंद में हीरों की प्राप्ति छत्तीसगढ़ के लिए एक गौरवशाली उपलब्धि है। यह खोज राज्य की समृद्ध खनिज संपदा को दर्शाती है और भविष्य में विकास, भारी निवेश तथा रोजगार के नए दरवाजे खोलेगी।”
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