Bengal Political Circus: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त क्या मिली, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर का ‘अंतरात्मा का स्वर’ अचानक जाग उठा है। राजनीतिक गलियारों में छनकर आ रही खबरों की मानें तो टीएमसी के कई माननीय सांसदों और विधायकों को रात में सपने में ‘कमल का फूल’ दिखाई दे रहा है। //आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// कयास लगाए जा रहे हैं कि दीदी की नाव से कूदकर ‘भगवा जहाज’ पर सवार होने के लिए करीब एक दर्जन से ज्यादा सांसद अपनी चप्पलें सीधी कर चुके हैं।
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दलबदल का ‘गणित’ और अंतरात्मा की ‘केमिस्ट्री’
सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल 12 सांसदों का दिल पूरी तरह भाजपा के लिए धड़क रहा है, और 5-6 अन्य ‘वेटिंग लिस्ट’ में हैं।//आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// कुल मिलाकर आंकड़ा 20 तक पहुंचाने की कोशिश है। अब आप सोच रहे होंगे कि अचानक 20 की ही संख्या क्यों? तो हुजूर, इसे ‘दलबदल विरोधी कानून’ से बचने का जुगाड़ कहते हैं।
पॉलिटिकल कैलकुलेटर: लोकसभा में टीएमसी के कुल 29 सांसद हैं। कानून कहता है कि जब तक दो-तिहाई (2/3) सांसद एक साथ पाला नहीं बदलते, तब तक ‘गद्दारी’ का ठप्पा लगा रहता है। जैसे ही आंकड़ा 20 पार हुआ, यह गद्दारी नहीं, बल्कि ‘वैचारिक क्रांति’ और ‘देशहित में लिया गया फैसला’ बन जाता है। मॉनसून सत्र तक इस गणितीय चमत्कार के स्क्रीनशॉट सामने आ सकते हैं।
मजेदार बात यह है कि इस कतार में खड़े कई चेहरे कल तक ममता दीदी और भतीजे अभिषेक बनर्जी के इतने करीबी थे कि उनके छींकने पर भी रुमाल लेकर दौड़ते थे।
विधायकों की ‘अटेंडेंस’ शॉर्ट, ‘पेट दर्द’ का बहाना चालू!
चुनाव हारने के बाद 20 मई को पार्टी ने जनता के बीच रोने-धोने और ‘सड़क की राजनीति’ पर लौटने के लिए एक महा-प्रदर्शन का आयोजन किया था। // आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// लेकिन विधायकों ने पार्टी को वो ‘अंगूठा’ दिखाया कि ममता बनर्जी भी देखती रह गईं।
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बुलाए गए: 80 विधायक
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पहुंचे: सिर्फ 35 विधायक
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गायब: 45 विधायक (शायद घर पर भाजपा का सदस्यता फॉर्म भर रहे थे)
हालांकि, पार्टी के संकटमोचक शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने डैमेज कंट्रोल करते हुए कहा, “अरे नहीं-नहीं, कोई नाराजगी नहीं है! वो कुछ विधायक अपनी पर्सनल जिम्मेदारियों और व्यावहारिक कारणों से नहीं आ पाए।” अब राजनीति में ‘व्यावहारिक कारण’ का असली मतलब क्या होता है, यह तो बच्चा-बच्चा जानता है।
डायमंड हार्बर में ‘क्लीन स्वीप’… पर खुद की ही झाड़ू से!
सबसे तगड़ा झटका तो अभिषेक बनर्जी के गढ़ ‘डायमंड हार्बर’ नगर पालिका में लगा है। यहाँ कुल 16 पार्षद थे और सभी के सभी टीएमसी के थे—विपक्ष का नामोनिशान नहीं था। लेकिन फलता में भाजपा की जीत क्या हुई, टीएमसी के 8 पार्षदों को अचानक लगा कि अब पार्षद की कुर्सी पर बैठने से पीठ में दर्द होता है।//आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// उन्होंने ‘निजी कारणों’ का बहाना बनाकर सामूहिक इस्तीफा दे दिया। यानी जहाँ कोई दुश्मन नहीं था, वहाँ खुद के ही लोगों ने आत्मघाती गोल दाग दिया।
अब देखना दिलचस्प होगा कि मॉनसून आते-आते टीएमसी में कितने ‘मौसम वैज्ञानिक’ बचते हैं और कितने भगवा रंग में रंग जाते हैं।







