कोरबा/बिलासपुर 27 मई:
रेल यात्रियों के लिए सफर को सुरक्षित, सुगम और समयबद्ध बनाने की दिशा में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के बिलासपुर मंडल ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। // आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// चांपा-गेवरारोड सेक्शन के महत्वपूर्ण मड़वारानी स्टेशन पर अतिरिक्त लूप लाइन अप और डाउन की कमीशनिंग का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस अपग्रेडेशन के बाद अब यात्रियों को आउटर या पिछले स्टेशनों पर होने वाली ट्रेनों की लेटलतीफी से बड़ी राहत मिलने वाली है।
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जापानी और ऑस्ट्रियाई तकनीक से लैस हुआ सेफ्टी सिस्टम
मड़वारानी स्टेशन के इस कायाकल्प की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) यहां स्थापित की गई //आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// अत्याधुनिक सिग्नलिंग और सेफ्टी सिस्टम है:
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कंप्यूटर आधारित रूटिंग: रेलवे ने पारंपरिक पैनल इंटरलॉकिंग को अलविदा कह दिया है। अब जापान की विश्वप्रसिद्ध तकनीक के जरिए ट्रेनों का रूट सेट करने और सिग्नल देने का पूरा काम कंप्यूटर आधारित हो गया है, जिससे मानवीय चूक की संभावना पूरी तरह खत्म हो गई है।
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डिजिटल एक्सल काउंटर: ट्रैक पर ऑस्ट्रियाई तकनीक पर आधारित ‘मल्टी-सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर सिस्टम’ लगाया गया है।
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जीरो एक्सीडेंट पॉलिसी: अत्याधुनिक सिग्नलिंग यह सुनिश्चित करती है कि जब तक एक ट्रैक पूरी तरह खाली न हो, दूसरी ट्रेन को हरी झंडी नहीं मिलेगी, जिससे टक्कर की संभावना खत्म हो जाती है।
अब एक्सप्रेस को रास्ता देने के लिए नहीं रुकेंगी पैसेंजर ट्रेनें
चांपा-गेवरारोड सेक्शन कोयला ढुलाई और यात्री परिवहन दोनों के लिहाज से बेहद व्यस्त रूट है। पहले मुख्य मार्ग पर किसी सुपरफास्ट या एक्सप्रेस ट्रेन को रास्ता (क्रॉसिंग) देने के लिए पैसेंजर या मालगाड़ियों को पिछले स्टेशनों पर घंटों खड़ा करना पड़ता था। // आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// अब मड़वारानी की अतिरिक्त लूप लाइनों पर उन्हें खड़ा कर एक्सप्रेस को तुरंत रास्ता दे दिया जाएगा, जिससे सभी ट्रेनें अपने सही समय पर चल सकेंगी।
बिना कोई ट्रेन रद्द किए पूरा हुआ काम (अनोखा मैनेजमेंट)
आमतौर पर इतने बड़े रीमॉडलिंग काम के लिए कई दिनों तक ट्रेनें रद्द या डायवर्ट की जाती हैं, //आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज//लेकिन बिलासपुर मंडल ने ‘शैडो ब्लॉक रणनीति’ का उपयोग कर एक भी ट्रेन को रद्द किए बिना यह काम पूरा किया। मड़वारानी में काम चलने के दौरान ही आसपास के स्टेशनों के इंजीनियरिंग कार्य भी निपटा लिए गए, जिससे बार-बार ब्लॉक लेने की जरूरत नहीं पड़ी।
सिविल इंजीनियरिंग के स्तर पर भी भारी बदलाव
पटरियों को टूटने से बचाने और ट्रेनों को रफ्तार देने के लिए बुनियादी ढांचे को बेहद मजबूत किया गया है:
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यार्ड के भीतर लगभग 595.69 मीटर पुरानी पटरियों को बदलकर नई और भारी क्षमता वाली रेल बिछाई गई है।
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जोड़ों को मजबूत करने के लिए 126 एटी वेल्डिंग के काम पूरे किए गए हैं।
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ट्रैक से 44 फिश प्लेटेड जॉइंट्स को वेल्डिंग के जरिए पूरी तरह खत्म कर दिया गया है और 40 ग्लूड जॉइंट्स का नवीनीकरण किया गया है, जिससे रेल फ्रैक्चर का खतरा न के बराबर रहेगा।








