Health News 25 May : अगर आप सोचते हैं कि शरीर में हीमोग्लोबिन (खून) की कमी सिर्फ थकान या चक्कर आने तक सीमित है, तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं। यह लापरवाही सीधे आपके दिल की धड़कनें रोक सकती है।//आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// जी हां, मेडिकल साइंस की एक नई और चौंकाने वाली रिसर्च में सामने आया है कि हीमोग्लोबिन का कम स्तर हार्ट अटैक और हार्ट फेल्योर के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है। खासकर जो लोग पहले से दिल की किसी बीमारी से जूझ रहे हैं, उनके लिए खून की यह कमी ‘टाइम बम’ की तरह साबित हो सकती है।
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आखिर क्यों खून की कमी बनते ही ‘विलेन’ बन जाता है दिल?
दरअसल, हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन का मुख्य काम फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर उसे पूरे शरीर के अंगों और कोशिकाओं तक पहुंचाना है।
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दिल पर दोगुना दबाव: जब शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर कम होता है, तो अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती।
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कमजोर होने लगती हैं नसें: इस ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए दिल को सामान्य से बहुत ज्यादा तेजी से पंप करना पड़ता है। लगातार ज्यादा मेहनत करने के कारण दिल की नसें कमजोर हो जाती हैं और हार्ट फेल्योर का रास्ता साफ हो जाता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा की रिसर्च: 10 हजार मरीजों पर बड़ा खुलासा
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा मेडिकल स्कूल की एक ताजा रिसर्च ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। //आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// इस स्टडी में करीब 10,000 ऐसे मरीजों को शामिल किया गया था, जो पहले से दिल की बीमारी से पीड़ित थे और उनके शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर कम था।
रिसर्च के मुख्य और डराने वाले बिंदु:
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हार्ट फेल्योर के मरीजों में एनीमिया ज्यादा: सामान्य लोगों की तुलना में दिल के मरीजों में एनीमिया (खून की कमी) की समस्या बहुत तेजी से पाई गई।/आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज/
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अस्पताल पहुंचने का खतरा 40% ज्यादा: रिसर्च के अनुसार, जिन दिल के मरीजों में खून की कमी होती है, उनके अस्पताल में भर्ती होने का खतरा 40 फीसदी तक बढ़ जाता है।
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मौत का जोखिम 30% बढ़ा: यूनिवर्सिटी के हार्ट फेल्योर प्रोग्राम के डायरेक्टर डॉ. इंदर एस. आनंद के मुताबिक, हार्ट फेल्योर के साथ एनीमिया से जूझ रहे मरीजों में मौत का खतरा 30 फीसदी तक बढ़ जाता है।/आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज/
इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज
अगर आपके शरीर में हीमोग्लोबिन कम हो रहा है, तो आपका शरीर ये सिग्नल देना शुरू कर देता है:
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📍थोड़ा सा चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूलना।
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📍बिना कोई भारी काम किए भी अत्यधिक थकान और कमजोरी महसूस होना।
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📍अचानक आंखों के आगे अंधेरा छाना या चक्कर आना।
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📍छाती में हल्का दर्द या धड़कन का अचानक तेज हो जाना।
कितना होना चाहिए नॉर्मल हीमोग्लोबिन? (जरूर चेक करें)
मेडिकल गाइडलाइंस के अनुसार, स्वस्थ रहने के लिए आपके शरीर में इतना हीमोग्लोबिन होना अनिवार्य है:
| वर्ग (Category) | न्यूनतम स्तर (Minimum Level) |
|---|---|
| महिलाएं (Women) | 12 g/dL से कम नहीं होना चाहिए |
| पुरुष (Men) | 13 g/dL से कम नहीं होना चाहिए |
बचाव के अचूक उपाय: कैसे रखें अपने दिल और खून को सुरक्षित?
अगर आप अपने दिल को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो आज ही से इन ४ बातों का गांठ बांध लें:
1📍रूटीन चेकअप: साल में कम से कम दो बार अपना CBC (Complete Blood Count) टेस्ट जरूर करवाएं ताकि हीमोग्लोबिन का पता चल सके।
2📍डाइट में बदलाव: अपने खाने में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 से भरपूर चीजें जैसे— पालक, चुकंदर, अनार, सेब, गुड़ और चना शामिल करें।
3📍डॉक्टर की सलाह: अगर हीमोग्लोबिन काफी कम है, तो खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह पर ही आयरन सप्लीमेंट या सिरप शुरू करें।
4📍संतुलित दिनचर्या: जंक फूड से दूरी बनाएं और रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉक या एक्सरसाइज जरूर करें।
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