कोरबा, 09 मई 2026: जेठ की तपती दुपहरी में जब सूरज आग उगल रहा है, तब कोरबा जिले के रामपुर क्षेत्र के जंगलों में ‘हरे सोने’ (तेंदूपत्ता) की चमक ग्रामीणों की जिंदगी रोशन कर रही है। शासन की कल्याणकारी योजनाओं और संग्रहण दर में ऐतिहासिक वृद्धि ने रामपुर की कारी बाई और खेमबाई जैसी हजारों महिलाओं के जीवन में प्रत्यक्ष बदलाव लाना शुरू कर दिया है।
उत्साह के साथ सीजन का आगाज
रामपुर संग्रहण केंद्र में इस सीजन की शुरुआत पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ हुई। यहाँ श्रीमती कारी बाई पटेल और श्रीमती खेमबाई पटेल ने पहली ‘बोहनी’ (पहली बिक्री) कर सीजन का श्रीगणेश किया। तड़के सुबह जंगल जाकर पत्ते चुनना और दोपहर तक उनकी गड्डियाँ बनाकर फड़ (खरीदी केंद्र) तक पहुँचाना अब ग्रामीणों के लिए केवल मेहनत नहीं, बल्कि उत्सव बन गया है।
₹5,500 की नई दर से बढ़ी आय
शासन ने इस वर्ष तेंदूपत्ता संग्रहण दर को ₹4,000 से बढ़ाकर ₹5,500 प्रति मानक बोरा कर दिया है। इस वृद्धि का सीधा लाभ ग्रामीणों की जेब तक पहुँच रहा है।
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बिचौलियों से मुक्ति: हितग्राही कारी बाई के अनुसार, सरकारी खरीदी समय पर होने से उन्हें अब बिचौलियों के पास नहीं जाना पड़ता।
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पारदर्शी भुगतान: वनोपज समिति प्रबंधकों ने सुनिश्चित किया है कि भुगतान सीधे डिजिटल माध्यम से बैंक खातों में हो, ताकि किसी भी प्रकार की देरी या भ्रष्टाचार की गुंजाइश न रहे।
महिलाओं की अहम भूमिका
तेंदूपत्ता सीजन जनजातीय परिवारों की आजीविका का मुख्य स्तंभ है। पत्तों की तुड़ाई से लेकर उनकी छंटाई और गड्डियाँ तैयार करने के कठिन कार्य में महिलाएं नेतृत्व कर रही हैं। अनुकूल मौसम के कारण इस बार पत्तों की गुणवत्ता भी काफी बेहतर है, जिससे बोनस और लाभांश मिलने की संभावना और बढ़ गई है।
प्रशासन की अपील
स्थानीय प्रशासन ने सभी संग्राहकों से आग्रह किया है कि वे अपना पत्ता केवल सरकारी सहकारी समिति केंद्रों पर ही बेचें। इससे उन्हें न केवल उचित मूल्य मिलेगा, बल्कि शासन की अन्य प्रोत्साहन योजनाओं और बोनस का सीधा लाभ भी सुनिश्चित होगा।
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