कोरबा 9 मई । ऊर्जाधानी कहे जाने वाले कोरबा में NTPC, CSEB और बालको पावर प्लांट के राखड़ बांधों (Ash Dykes) से उड़ने वाली महीन राख ने अब रिहायशी इलाकों को अपने आगोश में ले लिया है। आलम यह है की हल्की हवा चली नहीं पूरा शहर राख से पट जाता है। लोगों को सांस लेने में भी भारी तकलीफ हो रही है। //आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज//आज चली तेज हवा के साथ राखड बांध की राख इस बुरी कदर उड़ी कि शहरवासी परेशान हो गए। ये एक दिन की बात नहीं है अक्सर पूरे गर्मी भर वायु प्रदूषण की चपेट में शहर सहित आस पास के इलाक़े रहते हैं।

सड़कों पर ‘अदृश्य’ मौत का साया
आज तेज हवाओं के साथ उड़ती राख ने दोपहिया वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सड़कों पर विजिबिलिटी इतनी कम हो गई है कि कुछ मीटर दूर का देख पाना भी चुनौतीपूर्ण है।//आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज//आँखों में राख गिरने से लगातार दुर्घटनाओं की आशंका बनी हुई है। प्रशासन की ‘स्मार्ट सिटी’ की फाइलें शायद इन राख के ढेरों के नीचे दब गई हैं।

थाली से लेकर बिस्तर तक… हर जगह राख
स्थानीय निवासियों का दर्द उनकी बातों में साफ झलकता है।//आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज//घरों की खिड़कियां बंद होने के बावजूद राख की एक मोटी परत सोफे, बिस्तरों और यहाँ तक कि रसोई के बर्तनों पर जम रही है।
“हम खाना खा रहे हैं या राख, यह समझ पाना मुश्किल है। बच्चों और बुजुर्गों का सांस लेना दूभर हो गया है।” — एक पीड़ित निवासी
प्रशासनिक लापरवाही: नियमों की उड़ी धज्जियाँ
नियमों के मुताबिक राखड़ बांधों पर निरंतर पानी का छिड़काव होना अनिवार्य है ताकि राख उड़े नहीं। लेकिन धरातल पर स्थिति इसके उलट है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चुप्पी और संयंत्र प्रबंधन की लापरवाही ने कोरबा, दर्री, जमनीपाली, बालको , मानिकपुर और कुसमुंडा जैसे इलाकों को गैस चैंबर में तब्दील कर दिया है।
सेहत पर ‘स्लो पॉइजन’ का हमला
चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि यह राख केवल धूल नहीं, बल्कि जहरीले तत्वों का मिश्रण है।
-
श्वसन संबंधी बीमारियां: दमा (Asthma) और ब्रोंकाइटिस के मरीजों की संख्या में भारी उछाल।
-
आंखों का संक्रमण: हवा में मौजूद सिलिका और अन्य कण आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं।
-
एलर्जी: त्वचा और गले में लगातार खराश की शिकायतें बढ़ रही हैं।
-
कब जागेगा तंत्र?
सौंदर्यीकरण के नाम पर करोड़ों खर्च करने वाला नगर निगम और निगरानी करने वाला प्रदूषण विभाग आखिर मौन क्यों है? क्या कोरबा की जनता केवल बिजली उत्पादन की कीमत अपनी सेहत देकर चुकाती रहेगी? यह ‘राखड़ वर्षा’ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक काला धब्बा है।
-
नेताओ की चुप्पी?
- शहर के नेताओं ने भी इस गंभीर समस्या के मामले में पूरी तरह से चुप्पी साध ली है। //आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज//चुनाव के वक्त जरूर इनके द्वारा जनता से बड़े बड़े वादे किए जाते हैं की कोरबा शहर को पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त बनाएंगे। लेकिन जैसे ही इनका काम निकल जाता है। जनता जाए भाड़ में वाली शैली अपनाई जाती है। ऐसी स्थिति में कोरबा को प्रदूषण से मुक्ति कैसे मिलेगी ये अपने आप में बड़ा प्रश्न हैं।








