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छत्तीसगढ़ को मिली नई सौगात: कबीरधाम में ‘भोरमदेव जंगल सफारी’ का भव्य शुभारंभ

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कवर्धा 3 मई 2026: छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। कबीरधाम जिले के प्रसिद्ध भोरमदेव अभयारण्य में बहुप्रतीक्षित ‘भोरमदेव जंगल सफारी’ का भव्य लोकार्पण किया गया। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा, वन मंत्री  केदार कश्यप और सांसद  संतोष पाण्डेय ने संयुक्त रूप से फीता काटकर इस परियोजना को जनता को समर्पित किया।

प्राकृतिक सौंदर्य और रोमांच का नया ठिकाना

लगभग 352 वर्ग किलोमीटर में फैले इस अभ्यारण्य के भीतर 36 किलोमीटर लंबा सफारी रूट तैयार किया गया है।

यह सफारी घने वनों, ऊँची पहाड़ियों और नदियों के बीच से गुजरती है, जो पर्यटकों को वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक परिवेश में देखने का रोमांचक अवसर प्रदान करेगी। सफारी का मुख्य प्रवेश द्वार ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर के समीप करियाआमा में बनाया गया है।

स्थानीय रोजगार और इको-टूरिज्म को बढ़ावा

 

लोकार्पण समारोह के दौरान अतिथियों ने स्थानीय नेचर गाइड्स को जिप्सी की चाबियाँ और कैंपिंग किट प्रदान किए। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा, “यह सफारी न केवल पर्यटकों को आकर्षित करेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए गाइड और वाहन चालक के रूप में रोजगार के नए द्वार खोलेगी।”

वन मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को इको-टूरिज्म का हब बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जंगल, जल और पहाड़ इस क्षेत्र की असली ताकत हैं और अब इन्हें व्यवस्थित रूप से दुनिया के सामने पेश किया जा रहा है।

सफारी के प्रमुख आकर्षण केंद्र

भोरमदेव जंगल सफारी के दौरान पर्यटक इन विशेष स्थलों का अनुभव कर सकेंगे:

  • टेडगा सालेह और बकोदा ग्रासलैंड: यहाँ नीलगाय, हिरण और विविध पक्षी प्रजातियाँ देखी जा सकेंगी।

  • बर खोल्हा व्यू प्वाइंट: पहाड़ों का अद्भुत नजारा और प्राकृतिक प्रतिध्वनि (Echo) का अनुभव।

  • दूरदूरी जलप्रपात: घने जंगलों के बीच झरने की मधुर ध्वनि और शांति।

  • ऐतिहासिक स्थल: प्राचीन शनि मंदिर (कारियाआमा) और स्थानीय संस्कृति से जुड़ा ‘भाई-बहन कोरा’ स्थल।

  • बाज़ार डोंगरी: एडवेंचर प्रेमियों के लिए सीधी ढलान वाली रोमांचक पहाड़ी।

गरिमामयी उपस्थिति

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू, नगर पालिका अध्यक्ष  चंद्र प्रकाश चंद्रवंशी, कलेक्टर  गोपाल वर्मा, एसपी  धर्मेन्द्र कुमार छवई, डीएफओ  निखिल अग्रवाल सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

यह परियोजना छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को भी मजबूत करेगी।

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