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सियासी घमासान: महिला आरक्षण पर साय सरकार का ‘विशेष सत्र’ दांव, बघेल का तीखा पलटवार

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रायपुर 21 अप्रैल 2026 : छत्तीसगढ़ में महिला आरक्षण के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाने और विपक्ष के खिलाफ ‘निंदा प्रस्ताव’ लाने की घोषणा के बाद, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है।

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सरकार की रणनीति: सदन में घेराबंदी

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार इसी माह (संभावित तिथि 27 अप्रैल) विशेष सत्र बुलाकर महिला आरक्षण विधेयक पर कांग्रेस के रुख की आलोचना करेगी। भाजपा इस सत्र के माध्यम से जनता के बीच यह संदेश देना चाहती है कि कांग्रेस महिला सशक्तिकरण की राह में बाधा है।

बघेल का व्यक्तिगत तंज: “भाभी को बना दें सीएम”

भाजपा के इस कदम पर पलटवार करते हुए भूपेश बघेल ने मर्यादा और सियासत की लकीर खींचते हुए सीधे मुख्यमंत्री की पत्नी का जिक्र किया। उन्होंने कहा:

“विष्णु जी, अगर आपको महिलाओं की इतनी ही चिंता है, तो कौशल्या भाभी को ही मुख्यमंत्री बना दीजिए।”

बघेल ने भाजपा और उसके वैचारिक संगठनों पर हमला करते हुए कहा कि जनसंघ और आरएसएस ने कभी महिलाओं को शीर्ष नेतृत्व की अनुमति नहीं दी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि महिला आरक्षण की नींव राजीव गांधी ने रखी थी, जिसे भाजपा समर्थित ताकतों ने तब रोका था।

ऐतिहासिक संदर्भों की लड़ाई

बघेल ने कांग्रेस को महिला आरक्षण का वास्तविक श्रेय देते हुए कहा कि 1995 में पंचायती राज के जरिए लाखों महिलाओं को राजनीति में लाने का काम कांग्रेस ने ही किया था। अब देखना यह होगा कि राजभवन से विशेष सत्र की अनुमति मिलने के बाद सदन के भीतर यह बहस क्या रुख अख्तियार करती है।


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